
अजब-गजब: सोशल मीडिया पर इन दिनों ट्रेन के एक 1एसी (फर्स्ट एसी) केबिन का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में केबिन को बिल्कुल हनीमून सुइट या सुहागरात की सेज की तरह सजाया गया है। वीडियो देखने के बाद कुछ लोगों ने इसकी खूब तारीफ की, जबकि कई लोगों ने रेलवे से सवाल किया कि क्या ट्रेन के अंदर इस तरह की सजावट करना नियमों के अनुसार सही है।
वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि 1एसी के एक निजी केबिन को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है। केबिन की छत पर रंग-बिरंगे गुब्बारे लगाए गए हैं। दीवारों को गुलाब के फूलों और सजावटी लाइटों से सजाया गया है। फर्श पर गुलाब और अन्य फूलों की पंखुड़ियां बिछाई गई हैं। बर्थ पर गुलाब की पंखुड़ियों से दिल (हार्ट) का आकार बनाया गया है। इसके अलावा दीवार पर “I Love You” भी लिखा गया है, जिससे पूरा केबिन किसी हनीमून रूम जैसा दिखाई देता है।
What’s happening here 🥺😭🥺😭🥺😭 pic.twitter.com/PGW1TqmyWc
— Godman Chikna (@Madan_Chikna) July 7, 2026
जानकारी के मुताबिक, यह सजावट एक यात्री ने अपने जीवनसाथी को सरप्राइज देने के लिए खुद की थी। इस खास तैयारी का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे रोमांटिक और यादगार पहल बताया, जबकि कुछ लोगों ने सुरक्षा और रेलवे के नियमों को लेकर सवाल उठाए। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भारतीय रेलवे और रेल मंत्री को टैग करते हुए पूछा कि क्या ट्रेन के डिब्बे में इस तरह की सजावट की अनुमति है। लोगों का कहना था कि गुब्बारे, लाइटें और अन्य सजावटी सामान कहीं सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं बन सकते।
इन सवालों पर रेलवे ने अपनी सफाई दी है। रेलवे का कहना है कि यदि कोई यात्री 1एसी का पूरा निजी केबिन बुक करता है और अपने खर्च पर उसे सजाता है, तो इसमें रेलवे की कोई भूमिका नहीं होती। 1एसी के केबिन यात्रियों को निजी यात्रा का अनुभव देने के लिए बनाए जाते हैं और यात्रा के दौरान पूरा केबिन उसी यात्री के लिए आरक्षित रहता है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्री अपने आराम और खुशी के अनुसार केबिन को सजा सकते हैं, बशर्ते इससे किसी तरह का नुकसान, गंदगी या सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा न हो। रेलवे के अनुसार, इस तरह की सजावट अपने आप में किसी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं है। रेलवे की इस सफाई के बाद साफ हो गया है कि वायरल वीडियो में दिख रही सजावट रेलवे की ओर से नहीं कराई गई थी, बल्कि यह पूरी तरह यात्री की निजी पहल थी। इसलिए इसे नियमों के खिलाफ नहीं माना गया है।