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उड़ान के दौरान या जमीन पर… प्लेन ज्यादा फ्यूल कब खर्च करता है?

airplane fuel consumption

airplane fuel consumption

जब हम हवाई जहाज़ में बैठते हैं तो अक्सर यही सोचते हैं कि सबसे ज्यादा फ्यूल तो हवा में उड़ते समय ही खर्च होता होगा। आखिर प्लेन बहुत ऊंचाई पर तेज़ रफ्तार से लंबी दूरी तय करता है। लेकिन असल सच्चाई थोड़ी अलग है और समझने में भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, प्लेन का फ्यूल खर्च एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस स्टेज में है- जमीन पर चल रहा है, उड़ान भर रहा है, या फिर हवा में स्थिर गति से उड़ रहा है।

जमीन पर प्लेन क्या करता है
जब प्लेन रनवे तक पहुंचने के लिए धीरे-धीरे चलता है तो उसके इंजन चालू रहते हैं। इस दौरान भी फ्यूल खर्च होता है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। क्योंकि उस समय स्पीड कम होती है और इंजन को पूरी ताकत नहीं लगानी पड़ती। अगर एयरपोर्ट पर भीड़ ज्यादा हो और प्लेन को लंबे समय तक खड़ा रहकर इंतजार करना पड़े तो थोड़ा ज्यादा फ्यूल जरूर खर्च हो सकता है लेकिन फिर भी यह खर्च सीमित ही रहता है।

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असली खर्च टेकऑफ के समय
अब आता है वो हिस्सा जहां सबसे ज्यादा फ्यूल खर्च होता है- टेकऑफ। जब प्लेन जमीन से उड़ान भरता है तो उसे बहुत कम समय में बहुत तेज़ स्पीड पकड़नी होती है। इसके लिए इंजन पूरी ताकत से काम करते हैं। इस दौरान जितनी ऊर्जा लगती है उतनी पूरे सफर में किसी और समय नहीं लगती। यही वजह है कि कुछ ही मिनटों में काफी ज्यादा फ्यूल जल जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो टेकऑफ छोटा होता है लेकिन सबसे महंगा पड़ता है।

हवा में पहुंचने के बाद क्या
जैसे ही प्लेन अपनी तय ऊंचाई पर पहुंच जाता है उसकी स्पीड स्थिर हो जाती है और इंजन पर दबाव कम हो जाता है। इस स्टेज को क्रूज़ कहा जाता है। यहां प्लेन बहुत संतुलित तरीके से उड़ता है जिससे फ्यूल की खपत भी कंट्रोल में रहती है। यही कारण है कि प्लेन लंबी दूरी तय करता है लेकिन हर मिनट उतना फ्यूल नहीं जलाता जितना टेकऑफ के समय जलता है।

लैंडिंग के दौरान कम खर्च
जब प्लेन नीचे उतरने लगता है तो उसकी स्पीड धीरे-धीरे कम की जाती है। इंजन की ताकत भी घटा दी जाती है इसलिए इस दौरान फ्यूल की खपत कम हो जाती है। कई बार प्लेन हवा के सहारे भी नीचे आता है जिससे और कम फ्यूल लगता है।

अगर आप इसे कार से जोड़कर समझें तो टेकऑफ वैसा है जैसे आप अचानक कार को बहुत तेज़ स्पीड में ले जाते हैं – इसमें सबसे ज्यादा पेट्रोल खर्च होता है। वहीं हाईवे पर एक समान स्पीड में गाड़ी चलाना कम फ्यूल में ज्यादा दूरी तय करने जैसा होता है। प्लेन भी लगभग इसी तरीके से काम करता है।

प्लेन जमीन पर भी फ्यूल खर्च करता है और हवा में भी लेकिन सबसे ज्यादा खपत टेकऑफ के दौरान होती है।

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