Viral News: हैदराबाद के एक कलाकार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। हिंदू धर्म से जुड़े अनिल कुमार चौहान पिछले करीब 40 सालों से उर्दू और अरबी में खूबसूरत लिखावट कर रहे हैं। वह कई मस्जिदों की दीवारों पर कुरान की आयतें लिख चुके हैं। उनकी कला लोगों का दिल जीत रही है। उनकी यह कहानी दिखाती है कि कला और हुनर किसी धर्म की सीमा में बंधे नहीं होते और लोगों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।
कौन हैं अनिल कुमार चौहान?
अनिल कुमार चौहान हैदराबाद के पुराने शहर में रहने वाले एक कलाकार हैं। उनके सफर की शुरुआत दुकानों के नाम और साइन बोर्ड लिखने से हुई थी। उस समय कई दुकानों पर उर्दू में नाम लिखे जाते थे। इसी काम के दौरान उनकी रुचि उर्दू भाषा और उसकी लिखावट में बढ़ने लगी।
धीरे-धीरे उन्होंने खुद अभ्यास करके उर्दू लिखना सीखा। इसके बाद अरबी अक्षरों की खूबसूरत बनावट और कैलिग्राफी में भी महारत हासिल की। समय के साथ उनकी कला को पहचान मिलने लगी और उन्हें धार्मिक स्थलों पर लिखावट का काम मिलने लगा।
मस्जिदों में लिखते हैं कुरान की आयतें
अनिल कुमार चौहान अपनी खूबसूरत लिखावट से मस्जिदों की दीवारों को सजाते हैं। वह मस्जिदों में कुरान की आयतें और इस्लाम से जुड़ी बातें लिखते हैं। इसके अलावा, वह पैगंबर मोहम्मद की तारीफ में लिखी जाने वाली नअत-ए-शरीफ भी लिखते हैं।
बताया जाता है कि अनिल कुमार अब तक देशभर की 100 से ज्यादा मस्जिदों में लिखावट का काम कर चुके हैं। अपनी मेहनत और कला के दम पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है। उनकी कहानी बताती है कि अगर इंसान में कुछ सीखने का जुनून हो, तो वह अपनी मेहनत से किसी भी कला में महारत हासिल कर सकता है।
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काम को लेकर उठे सवाल, फिर लिया विद्वानों से मार्गदर्शन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अनिल कुमार चौहान ने मस्जिदों में कुरान की आयतें लिखना शुरू किया, तो कुछ लोगों ने उनके हिंदू होने को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद की मशहूर इस्लामी संस्था जामिया निजामिया के विद्वानों से सलाह ली।
मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने अपना काम जारी रखा। आज उनकी लिखावट कई मस्जिदों में देखने को मिलती है। उनकी कहानी बताती है कि कला और हुनर लोगों को जोड़ने का काम करते हैं और इंसानियत सबसे बढ़कर है।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं तारीफ
अनिल कुमार चौहान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी कला और मेहनत की सराहना कर रहे हैं। कई यूजर्स उनकी कहानी को हैदराबाद की गंगा-जमुनी तहजीब से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनकी कला शहर की पुरानी परंपराओं और आपसी मेलजोल की याद दिलाती है।
अनिल कुमार चौहान की कहानी सिर्फ एक कलाकार की सफलता तक सीमित नहीं है। यह उस लगन की कहानी भी है, जिसमें इंसान अपनी मेहनत और हुनर से पहचान बनाता है। उनकी कला यह दिखाती है कि भाषा, संस्कृति और रचनात्मकता लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।
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