नेशनल डेस्क : बिहार की राजधानी पटना का (NMCH) अस्पताल हमेशा चर्चा में बनी रहती है। आज एक बार फिर यह अस्पताल चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन इस बार वजह है एक महिला का शव गायब हो जाना। यह मामला उस अस्पताल की व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े करता है, जो पहले भी कई बार विवादों में रहा है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
12 दिनों तक शव की तलाश, फिर भी नहीं मिला
आपको बता दें कि मामला मीना देवी नामक एक महिला के शव से जुड़ा है। पीड़ित परिवार के मुताबिक, महिला का शव अस्पताल में गायब हो गया, और परिवार के लोग शव की तलाश में 12 दिनों तक अस्पताल के चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें शव नहीं मिला। अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि शव का कोई पता नहीं है। अंत में, मजबूर होकर पीड़ित परिवार को पुआल का पुतला बनाकर महिला का श्राद्धकर्म करना पड़ा।
गरीब परिवार को मजबूरी में करना पड़ा श्राद्धकर्म
मृतका मीना देवी के बेटे दीपक कुमार के अनुसार, उनकी मां और वह खुद 11 मई को सालिमपुर से पटना लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें बख्तियारपुर में टक्कर मार दी। दोनों गंभीर रूप से जख्मी हुए थे, और तेजस्वी यादव के काफिले से उन्हें बख्तियारपुर अस्पताल लाया गया था। बाद में उन्हें एनएमसीएच रेफर किया गया, लेकिन बाद में यह हुआ कि अस्पताल प्रशासन शव का पता तक नहीं लगा सका। अस्पताल की लापरवाही के कारण परिवार को अंतिम संस्कार के लिए पुआल का पुतला बनाना पड़ा। परिवार बेहद गरीब था और मजबूरी में चंदा इकट्ठा कर श्राद्धकर्म किया।
कुछ ही दिन पहले चूहों ने एक मरीज की…
यह पहली बार नहीं है कि एनएमसीएच विवादों में घिरा है। कुछ ही दिन पहले चूहों ने एक मरीज की उंगलियां काट दीं, जो पहले से ही गंभीर स्थिति में था। यह घटना तब हुई जब अवधेश कुमार नामक मरीज पटना के एनएमसीएच के हड्डी रोग विभाग में भर्ती थे। रात के समय जब वह सो रहे थे, तब चूहे ने उनकी उंगलियां काट डालीं। इस मामले ने बिहार के विपक्षी दलों को झकझोर दिया और तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया।
राजनीतिक बवाल और सवाल उठाते नेता
इस बार भी तेजस्वी यादव ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना था कि यह घटनाएं दिखाती हैं कि एनएमसीएच की व्यवस्थाएं बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं और वहां के अस्पताल प्रशासन को सुधारने की जरूरत है। यह घटनाएं राज्य के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। दूसरी ओर, सरकार ने अब तक इस मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, और मरीजों और उनके परिवारों को इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। एनएमसीएच में हो रही इस तरह की घटनाओं ने अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है, और लोगों की जीवन की सुरक्षा को लेकर भारी सवाल खड़े किए हैं।
उम्मीदें और जवाबदेही
अब यह देखना होगा कि क्या बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ऐसे मामले आम होते रहेंगे। फिलहाल, पीड़ित परिवार और बिहार की जनता को इंतजार है कि इस घटनाक्रम का उचित जवाब कब मिलेगा।

