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EV खरीदने से पहले ये 7 बातें नहीं जानेंगे तो होगा नुकसान

Electric Vehicle Buying Guide

Electric Vehicle Buying Guide

पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। अब केवल बड़े शहरों तक ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी लोग इलेक्ट्रिक कार और इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कम रनिंग कॉस्ट पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प और नई तकनीक जैसे कई कारण लोगों को EV की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

हालांकि केवल ट्रेंड को देखकर या किसी की सलाह पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीद लेना सही फैसला नहीं होता। EV की तकनीक पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों से काफी अलग है। ऐसे में खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना जरूरी है। अगर इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो बाद में चार्जिंग, बैटरी, सर्विस या रेंज जैसी समस्याएं आपके अनुभव को खराब कर सकती हैं। अगर आप भी जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो इन सात बातों को अच्छी तरह समझना आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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1. सबसे पहले अपनी जरूरत को समझें ट्रेंड देखकर फैसला न लें
कई लोग यह सोचकर EV खरीद लेते हैं कि इससे ईंधन पर होने वाला खर्च पूरी तरह खत्म हो जाएगा। लेकिन सबसे पहला सवाल यह होना चाहिए कि आपकी रोजाना की जरूरत क्या है।

अगर आपकी दैनिक यात्रा 30 से 60 किलोमीटर के बीच है तो लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर आपकी जरूरत आसानी से पूरी कर सकता है। वहीं, अगर आपका काम रोज लंबी दूरी तय करने का है या आपको अक्सर दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है, तो आपको ऐसी EV चुननी होगी जिसकी वास्तविक रेंज ज्यादा हो और जिसे फास्ट चार्ज किया जा सके। जरूरत से बड़ी बैटरी वाला मॉडल खरीदना हमेशा समझदारी नहीं होती क्योंकि बड़ी बैटरी के साथ वाहन की कीमत भी काफी बढ़ जाती है। इसलिए खरीदने से पहले अपने ड्राइविंग पैटर्न का आकलन करना सबसे जरूरी कदम माना जाता है।

2. कंपनी की बताई गई रेंज और वास्तविक रेंज
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय सबसे ज्यादा ध्यान उसकी रेंज पर दिया जाता है। कंपनियां अपने विज्ञापनों में एक तय रेंज बताती हैं लेकिन यह रेंज नियंत्रित परीक्षण परिस्थितियों में हासिल की जाती है। असल सड़क पर मिलने वाली रेंज कई बातों पर निर्भर करती है। अगर वाहन लगातार ट्रैफिक में चल रहा है, एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है सड़क पर चढ़ाई है या वाहन में ज्यादा भार है तो बैटरी अपेक्षाकृत जल्दी खत्म हो सकती है। वहीं मौसम भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। बहुत अधिक गर्मी या ठंड बैटरी की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

यही वजह है कि वाहन खरीदने से पहले केवल कंपनी के दावे पर भरोसा करने के बजाय वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव और स्वतंत्र टेस्ट रिपोर्ट भी देखनी चाहिए। इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में वाहन कितनी दूरी तय कर सकता है।

3. घर पर चार्जिंग की सुविधा सबसे बड़ी जरूरत है
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले यह देखना बेहद जरूरी है कि आपके घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकती है या नहीं। अगर आपके पास निजी पार्किंग है, तो होम चार्जर लगवाना अपेक्षाकृत आसान होता है। रात में वाहन चार्ज करके अगली सुबह बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकता है। यही सुविधा EV के सबसे बड़े फायदों में से एक मानी जाती है।

लेकिन अगर आप किसी अपार्टमेंट में रहते हैं या आपके पास निर्धारित पार्किंग नहीं है तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वहां चार्जिंग पॉइंट लगाने की अनुमति मिल सकती है या नहीं। कई लोगों को वाहन खरीदने के बाद इस समस्या का सामना करना पड़ता है जिससे रोजाना चार्जिंग करना मुश्किल हो जाता है।

4. चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क भी उतना ही महत्वपूर्ण है
घर पर चार्जिंग होने के बावजूद सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता को अनदेखा नहीं किया जा सकता। अगर आप अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं तो रास्ते में चार्जिंग स्टेशन का होना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा है लेकिन अभी भी सभी शहरों और सभी हाईवे पर समान स्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इसलिए वाहन खरीदने से पहले यह देखना बेहतर रहेगा कि आपके शहर, ऑफिस जाने वाले रास्ते और नियमित यात्रा वाले रूट पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं या नहीं। इससे यात्रा के दौरान बैटरी खत्म होने की चिंता काफी हद तक कम हो जाती है।

5. बैटरी वारंटी और भविष्य में होने वाले खर्च को समझना जरूरी है
इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी उसकी सबसे महंगी और सबसे महत्वपूर्ण यूनिट होती है। इसलिए केवल वाहन की कीमत देखकर फैसला लेना सही नहीं होगा।

आज अधिकांश कंपनियां बैटरी पर लगभग आठ साल या निर्धारित किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं। हालांकि हर कंपनी की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। कुछ मामलों में वारंटी केवल मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर लागू होती है जबकि सामान्य उपयोग से होने वाली क्षमता में कमी के लिए अलग नियम हो सकते हैं। वाहन खरीदने से पहले यह जान लेना चाहिए कि बैटरी वारंटी किन शर्तों के साथ मिल रही है और भविष्य में बैटरी बदलवाने की स्थिति में अनुमानित खर्च कितना आ सकता है। इससे आपको लंबे समय की लागत का बेहतर अंदाजा मिल सकेगा।

6. सर्विस नेटवर्क मजबूत है या नहीं इसकी भी जांच करें
EV में इंजन, गियरबॉक्स और कई पारंपरिक पार्ट्स नहीं होते इसलिए लोग अक्सर मान लेते हैं कि इसमें सर्विस की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पूरी तरह सही नहीं है। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सॉफ्टवेयर अपडेट, ब्रेक, सस्पेंशन, टायर और अन्य तकनीकी हिस्सों की समय-समय पर जांच जरूरी होती है। अगर आपके शहर में कंपनी का अधिकृत सर्विस सेंटर नहीं है, तो छोटी समस्या के लिए भी दूसरे शहर जाना पड़ सकता है।

इसलिए वाहन खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि कंपनी का सर्विस नेटवर्क कितना मजबूत है और जरूरत पड़ने पर स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध हो पाएंगे या नहीं।

7. केवल कीमत नहीं, पूरे खर्च का हिसाब लगाइए
बहुत से लोग EV खरीदते समय केवल ऑन-रोड कीमत की तुलना पेट्रोल या डीजल वाहन से करते हैं। लेकिन सही तुलना वाहन की कुल ओनरशिप कॉस्ट के आधार पर की जानी चाहिए।

इलेक्ट्रिक वाहन में ईंधन का खर्च कम जरूर होता है लेकिन बिजली की लागत, बीमा, टायर बदलने का खर्च, नियमित सर्विस, एक्सटेंडेड वारंटी और अगर जरूरत पड़े तो फास्ट चार्जिंग का खर्च भी कुल लागत का हिस्सा होता है।

अगर आप कई वर्षों तक वाहन रखने की योजना बना रहे हैं तो इन सभी खर्चों को जोड़कर तुलना करना ज्यादा समझदारी होगी। इससे आपको यह स्पष्ट हो जाएगा कि आपकी जरूरत के हिसाब से EV वास्तव में किफायती साबित होगा या नहीं।

क्या अभी EV खरीदना सही फैसला है?
इस सवाल का एक ही जवाब सभी लोगों के लिए सही नहीं हो सकता। अगर आपकी ज्यादातर यात्रा शहर के भीतर होती है घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है और रोजाना बहुत लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती तो इलेक्ट्रिक वाहन आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसकी रनिंग कॉस्ट कम होती है और नियमित उपयोग में ईंधन पर अच्छा-खासा खर्च बचाया जा सकता है।

वहीं जिन लोगों को लगातार लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है या ऐसे क्षेत्रों में रहना पड़ता है जहां चार्जिंग नेटवर्क अभी सीमित है उन्हें खरीदने से पहले अपनी जरूरतों का सावधानी से मूल्यांकन करना चाहिए।

इलेक्ट्रिक वाहन भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का भविष्य माने जा रहे हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या लगातार बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसकी खूबियों के साथ-साथ उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है।

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