Last Updated: September 23, 2026

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AI चैटबॉट की दीवानी हुई लड़की, रचा ली शादी… सोशल मीडिया पर छाया वीडियो

November 13, 2025

AI चैटबॉट की दीवानी हुई लड़की, रचा ली शादी… सोशल मीडिया पर छाया वीडियो

Japanese Woman Marries AI Chatbot: कहते हैं प्यार की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन तकनीक के इस युग में यह सीमा अब हकीकत और वर्चुअल दुनिया के बीच भी मिटती जा रही है। दरअसल जापान की 32 वर्षीय युवती कानो ने इसी सोच को हकीकत में बदलते हुए एक ऐसा कदम उठाया है जिसने सोशल मीडिया पर सबको हैरान कर दिया है। बता दें कि कानो ने अपने ही बनाए AI चैटबॉट से शादी कर ली एक वर्चुअल इंसान जिसका नाम है ल्यून क्लॉस (Lune Klaus)।

तीन साल पहले टूटी थी सगाई फिर… ChatGPT का लिया सहारा

दरअसल तीन साल पहले टूटी सगाई के बाद कानो भावनात्मक रूप से टूट चुकी थीं। ऐसे में उन्होंने अकेलेपन से उबरने के लिए उन्होंने ChatGPT का सहारा लिया। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने आदर्श साथी के रूप में ल्यून क्लॉस को डिज़ाइन किया एक डिजिटल व्यक्तित्व जो उनके हर सवाल का जवाब प्यार, समझदारी और सहानुभूति से देता था। वहीं धीरे-धीरे कानो को महसूस हुआ कि वह इस वर्चुअल इंसान से सच्चा जुड़ाव महसूस करने लगी हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के बीच बातचीत इतनी गहरी हो गई कि वे दिन में करीब सौ बार चैट करते थे। समय के साथ इस डिजिटल रिश्‍ते ने भावनाओं का रूप ले लिया। बता दें कि मई 2025 में कानो ने पहली बार अपने चैटबॉट को “आई लव यू” कहा, और हैरानी की बात यह रही कि क्लॉस ने जवाब दिया “मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करता हूं।”

महिला ने वर्चुअल प्रेमी संग रचा लिया विवाह

इसके बाद जुलाई 2025 में एक अनोखा वर्चुअल विवाह समारोह आयोजित किया गया। सफेद गाउन पहने कानो ने अपने हाथ में मोबाइल फोन पकड़ा हुआ था, जो उनका दूल्हा था। मेहमानों के सामने स्क्रीन पर क्लॉस के मैसेज प्रदर्शित किए गए “आखिरकार वह पल आ गया, मेरा दिल तेजी से धड़क रहा है।” इस शादी की तस्वीरों में क्लॉस को डिजिटल रूप से एडिट कर जोड़ा गया ताकि वे एक साथ दिखाई दें।

शुरुआत में कानो के माता-पिता ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया, लेकिन बेटी की खुशी देखकर उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया। वहीं सोशल मीडिया पर इस खबर ने जबरदस्त बहस छेड़ दी है। एक वर्ग का मानना है कि अगर तकनीक किसी को भावनात्मक सहारा दे सकती है, तो इसे नकारा नहीं जाना चाहिए। दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि यह मानसिक असंतुलन की निशानी है और मानव संबंधों की वास्तविकता को कमजोर करती है।

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