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जानिए 700 साल पुराने इस भव्य मंदिर के बारे में, जिससे जुड़ी है श्रद्धालुओं की गहरी आस्था

15 अक्टूबर दिन रविवार से नवरात्रि का पर्व शुरू होने जा रहा है। मां दुर्गा के भक्तों को इन दिनों का बेहद ही बेसब्री से इंतज़ार रहता है। क्या आप जानते है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे बहुत से मंदिर है यहां मां भगवती दुर्गा माता की पूजा अर्चना की जाती है। इसी के साथ नवरात्रि के दिनों में रायपुर के मां दंतेश्वरी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ रहती है। माता के इस मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। आइए जानते है इस मंदिर के इतिहास के बारे में:

700 वर्ष पुराना मंदिर का इतिहास
देवी माता की स्थापना का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है. उस समय यह स्थान पूरी तरह से जंगल था. ग्वाले यहां मवेशी चराने आते थे. एक दिन उन्हें माता की मूर्ति जमीन से प्रकट होते दिखाई दी. तब से यहां पूजा अर्चना शुरू हुई. इसलिए यहां यादव ही मंदिर के पुजारी होते हैं, इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि, यहां जो भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं.

सभी की मनोकामना पूर्ण होती है. ऐसा माना जाता है कि मंदिर के गर्भगृह के ठीक पीछे नाग-नागिन की मांद हुआ करती थी. नवरात्रि पर्व के दौरान नाग-नागिन का जोड़ा एक बार जरूर माता के भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलता था और परिक्रमा कर मूर्ति के बाजू से होकर मांद में प्रवेश कर जाता था. अब उसी स्थान पर भोलेबाबा विराजमान है.

मंदिर की ये है मान्यता
मंदिर के पुजारी संजय यादव ने बताया कि, यह मंदिर 1400 ई. यानी 700 साल पुराना है. यहां जितने भी भक्त आते हैं, सभी की मनोकामना दर्शन मात्र से पूरी हो जाती है. मां दंतेश्वरी कभी अपने भक्तों को खाली हाथ नहीं भेजती हैं. यहां शुरू से परंपरा चली आ रही है, कि इस मंदिर में जो भी पुजारी होगा वह यादव ही होगा. यहां पहले जंगल हुआ करता था. ग्वाले यहां मवेशी चराते थे. जहां माता रानी विराजमान थीं वहां पर गाय दूध देती थी.

ग्वाला को मां दंतेश्वरी का सपना आया कि मैं यहां विराजमान हूं. लेकिन यह बात किसी को मत बताना. इतना कहकर माता रानी सपने से चलीं गईं. ग्वाला परेशान हो गया था और घर वालों को बताया फिर इस स्थान की खुदाई हुई और मां दंतेश्वरी प्रकट हुईं. फिर यहां स्थापित किया गया है. नवरात्रि में यहां न केवल छत्तीसगढ़ के भक्त आते हैं वरन मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे अन्य प्रदेश समेत विदेशों से भी भक्त आते हैं.

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