दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां गर्मियों के दौरान रात में भी सूरज डूबता नहीं है। यानी आधी रात के समय भी बाहर उजाला दिखाई देता है। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यह पूरी तरह सच है। ऐसी जगहों को “मिडनाइट सन” यानी आधी रात का सूरज कहा जाता है।
सबसे ज्यादा चर्चा नॉर्वे की होती है जिसे “Land of the Midnight Sun” भी कहा जाता है। यहां साल के कुछ महीनों में सूरज लगातार कई घंटों तक आसमान में दिखाई देता रहता है और पूरी तरह रात नहीं होती।
आखिर ऐसा क्यों होता है?
पृथ्वी अपनी धुरी पर थोड़ी झुकी हुई है। इसी वजह से साल के अलग अलग समय में पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक पड़ती है। नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड और अलास्का जैसे इलाके पृथ्वी के उत्तरी हिस्से में बहुत ऊपर स्थित हैं। गर्मियों में यहां सूरज पूरी तरह क्षितिज के नीचे नहीं जाता इसलिए रात में भी उजाला बना रहता है।
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नॉर्वे में कितने समय तक नहीं होती रात?
नॉर्वे के कुछ हिस्सों में मई से जुलाई तक करीब 24 घंटे सूरज दिखाई दे सकता है। खासकर नॉर्वे के उत्तरी शहरों में कई हफ्तों तक सूरज डूबता ही नहीं है। वहीं सर्दियों में इसका बिल्कुल उल्टा होता है। उस समय कई दिनों तक सूरज दिखाई नहीं देता और लगातार अंधेरा बना रहता है।
वहां रहने वाले लोग कैसे रहते हैं?
शुरुआत में वहां जाने वाले लोगों को काफी अजीब महसूस हो सकता है क्योंकि शरीर दिन और रात के हिसाब से काम करने का आदी होता है। लेकिन वहां रहने वाले लोग इस माहौल के साथ खुद को ढाल लेते हैं। लोग सोने के लिए मोटे पर्दों और ब्लैकआउट कर्टन का इस्तेमाल करते हैं ताकि कमरे में अंधेरा बनाया जा सके। इसके अलावा वे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या घड़ी के हिसाब से तय करते हैं न कि बाहर की रोशनी देखकर।
क्या इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ता है?
लगातार उजाला या लगातार अंधेरा कुछ लोगों की नींद और मूड पर असर डाल सकता है। इसलिए वहां रहने वाले लोग अपनी नींद का खास ध्यान रखते हैं। कई लोग डॉक्टर की सलाह से लाइट थेरेपी या विशेष रूटीन भी अपनाते हैं।
पर्यटकों के लिए क्यों खास है यह जगह?
दुनिया भर से लोग “मिडनाइट सन” देखने के लिए नॉर्वे और दूसरे उत्तरी देशों में जाते हैं। रात के समय भी सूरज को चमकते देखना लोगों के लिए एक अनोखा अनुभव होता है। यही वजह है कि यह प्राकृतिक घटना पर्यटन का बड़ा आकर्षण बन चुकी है।

