Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क और लगातार हो रहे आधुनिकीकरण के कारण अक्सर सुर्खियों में रहता है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों से लेकर स्टेशन पुनर्विकास तक, रेलवे ने कई ऐसे काम किए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। लेकिन इन सबके बीच आज भी कुछ ऐसे स्टेशन हैं, जो अपने अनोखे नियमों और परंपराओं के कारण अलग पहचान बनाए हुए हैं। इन्हीं में से एक है भारत का वह रेलवे स्टेशन, जहां रविवार के दिन ट्रेन की सीटी तक सुनाई नहीं देती।
भारत के कुछ बेहद खास रेलवे स्टेशन
भारत में कई रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जिनकी विशेषताएं हैरान कर देती हैं। कहीं स्टेशन दो राज्यों में बंटा हुआ है, तो कहीं जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं, देश में 28 अक्षरों वाला स्टेशन नाम भी मौजूद है। इन अनोखे स्टेशनों की सूची में एक ऐसा स्टेशन भी शामिल है, जिसका न तो कोई नाम है और न ही रविवार को यहां कोई हलचल।
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रविवार को क्यों बदल जाता है रेलवे का हाल
आमतौर पर रविवार को भारतीय रेलवे ट्रैक मरम्मत और रखरखाव के लिए बड़े ब्लॉक लेता है। इसी वजह से कई ट्रेनों के समय में बदलाव या रद्द होने की स्थिति बन जाती है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे रविवार को यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस ऑनलाइन जरूर जांच लें।
कहां है वह स्टेशन जहां नहीं बजती सीटी
पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के पास स्थित यह छोटा सा रेलवे स्टेशन अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। बर्धमान से लगभग 35 किलोमीटर दूर मौजूद इस स्टेशन पर आम दिनों में केवल बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है। लेकिन रविवार को यह ट्रेन भी यहां नहीं आती। नतीजतन, पूरे दिन स्टेशन पर न कोई ट्रेन आती है, न हॉर्न बजता है और न ही कोई अनाउंसमेंट होती है।
रविवार को क्यों बंद रहती हैं सेवाएं
स्थानीय जानकारी के अनुसार, रविवार के दिन स्टेशन मास्टर टिकट लाने के लिए बर्धमान शहर जाते हैं। इसी कारण उस दिन टिकट काउंटर समेत सभी सेवाएं बंद रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस स्टेशन का कोई आधिकारिक नाम भी नहीं है। इसके बावजूद यह आसपास के गांवों के लोगों के लिए बेहद जरूरी पड़ाव माना जाता है।
बीते समय की याद दिलाता स्टेशन
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे छोटे स्टेशन पहले दूर-दराज के इलाकों को रेल सेवा से जोड़ने के लिए बनाए गए थे। भले ही आज डिजिटल टिकटिंग और बड़े स्टेशनों के चलते इनकी भूमिका बदल गई हो, लेकिन ये स्टेशन आज भी पुराने दौर की सादगी और जरूरतों की कहानी बयां करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। दैनिक सवेरा टाइम्स किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।