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VIDEO : धार्मिक आयोजन के बाद नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर चढ़ाया दूध… पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

milk, Narmada River

Ajab-Gajab News : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में बड़ी मात्रा में दूध चढ़ाने का एक मामला सामने आया है, जो इन दिनों चर्चा में है। यह घटना एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

कहां और कैसे हुआ यह आयोजन?
यह आयोजन सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील के सतदेव गांव में स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में किया गया। यह स्थान सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। यहां 21 दिनों तक एक बड़ा धार्मिक अनुष्ठान (महायज्ञ) चल रहा था। इस अनुष्ठान के समापन के अवसर पर आयोजकों ने एक टैंकर से करीब 11 हजार लीटर दूध नर्मदा नदी में चढ़ाया। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा बताया गया।

 

आयोजकों ने क्या कहा?
आयोजकों के अनुसार, यह दूध नर्मदा नदी को पवित्र करने के लिए चढ़ाया गया था। उनका मानना है कि इससे जल शुद्ध होता है और यह श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना का एक तरीका है।

पर्यावरणविदों ने क्यों जताई चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद पर्यावरण से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध नदी में डालना नुकसानदायक हो सकता है। पर्यावरण कार्यकर्ता के अनुसार दूध पानी में घुलकर ऑक्सीजन की मात्रा कम कर सकता है। इससे नदी के इकोसिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। पानी में रहने वाले जीवों और मछलियों के लिए खतरा बढ़ जाता है, जो लोग इस नदी के पानी पर निर्भर हैं,  उनके लिए भी यह नुकसानदायक हो सकता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्या खतरे हैं?
पर्यावरण विशेषज्ञ ने बताया कि 11 हजार लीटर दूध एक बड़ा जैविक प्रदूषक (organic pollutant) है। इसे पानी में टूटने के लिए बहुत अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे जलीय जीवों की मौत हो सकती है। इससे यूट्रोफिकेशन (पानी में पोषक तत्वों की अधिकता) की समस्या हो सकती है। पानी पीने योग्य नहीं रह सकता।

नर्मदा नदी का क्या है महत्व
नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलती है और पश्चिम दिशा में बहती है। यह महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरती है और अंत में खंभात की खाड़ी के रास्ते अरब सागर में मिल जाती है। यह नदी लाखों लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है।

 

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