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शेरनी ने शावकों को नहीं पिलाया अपना दूध, बोतल के दूध से पल रहा बिन मां का शावक, जी रहा बेहतर ज़िंदगी

इटावा: इटावा सफारी पार्क में बिना मां का एक शावक बोतल के दूध से पल बढ़ रहा है। बिन मां का शावक सफारी प्रबंधन के अधिकारियों और कर्मियों की मेहनत के बल पर दूध के सहारे छह माह की जिंदगी बसर करने में कामयाब हो गया है। पार्क के निदेशक डॉ.अनिल पटेल ने सोमवार को बताया कि शेरनी रूपा ने जिस शावक को छोड़ दिया था वह तीन मार्च को छह माह का हो गया है। शावक पूरी तरह स्वस्थ है। उसकी बेहतर से बेहतर देखभाल की जा रही है । उन्होंने इस शावक की देखभाल करने वाले कीपर अजय सिंह को फिर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और अपनी ओर से 5000 का नगद पुरस्कार भी दिया।

सफारी की इस कामयाबी को एक नए इतिहास की नजर से देखा जा रहा है। शेरनी ने दूध नहीं पिलाया तो बोतल से दूध पिलाया, फूड सप्लीमेंट दिए और अच्छी खबर यह है कि मां ने जिसे छोड़ दिया था वह शावक आज पूरी तरह स्वस्थ है। इससे पहले देश में कहीं ऐसा मामला सामने नहीं आया है कि शेरनी ने जिस शावक को छोड़ दिया वह जीवित रहे और 6 माह बाद भी स्वस्थ है।

विशेषज्ञों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए निदेशक पटेल ने बताया कि आमतौर पर शेरनी को लगता है कि शावक नहीं बचेगा तो वह उसे अपनाती नहीं है और दूध भी नहीं पिलाती है। इस शावक को भी शेरनी रुपा ने छोड़ दिया था इसके बाद सफारी प्रशासन इस शावक की जिम्मेदारी उठाई और कीपर अजय सिंह ने मां की तरह पालन पोषण किया। शेरनी रूपा द्वारा छोड़ दिए गए शावक की बेहतर देखभाल का नतीजा यह निकला है कि मां का दूध पिए बिना और मां का प्यार दुलार पाए बिना भी यह शावक छह माह का हो गया है और अब उछलकूद कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इटावा सफारी पार्क में शेरनी रूपा ने तीन सितंबर को इस शावक को जन्म दिया था लेकिन जन्म देने की तुरंत बाद रूपा ने इस शावक को अपनाया नहीं तथा उसे दूध भी नहीं पिलाया। शेरनी द्वारा शावक की अनदेखी दिए जाने के बाद सफारी प्रशासन ने उसे अपने हाथ में लिया और सफारी के अस्पताल में रखकर उसकी बेहतर देखभाल की गई।

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