मध्य पूर्व में बढ़ते हमलों और कई देशों की भागीदारी ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तेज़ सैन्य कार्रवाई, मिसाइल और ड्रोन हमले, खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें – सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक एक ही सवाल गूंज रहा है-क्या यह तीसरा विश्व युद्ध है?
हालात गंभीर जरूर हैं लेकिन किसी भी संघर्ष को “विश्व युद्ध” कहने से पहले इतिहास को समझना जरूरी है। आखिर पहले और दूसरे विश्व युद्ध कैसे शुरू हुए थे?
पहला विश्व युद्ध
साल 1914 – यूरोप पहले से ही तनाव में था। बड़े-बड़े देश हथियार जमा कर रहे थे और एक-दूसरे के खिलाफ गुप्त सैन्य समझौते कर चुके थे। 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी के युवराज आर्कड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड (Archduke Franz Ferdinand) की सारायेवो में हत्या कर दी गई। यह घटना चिंगारी साबित हुई।
इसके बाद घटनाएं तेजी से बढ़ीं-
ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर हमला किया।
रूस सर्बिया के समर्थन में आया।
जर्मनी ने ऑस्ट्रिया-हंगरी का साथ दिया।
ब्रिटेन और फ्रांस भी युद्ध में कूद पड़े।
उस समय दुनिया दो बड़े गुटों में बंटी थी। एक देश पर हमला हुआ तो उसके सहयोगी भी शामिल हो गए। यही सिलसिला पूरे यूरोप से होता हुआ अमेरिका तक पहुंच गया। इसे ही पहला विश्व युद्ध कहा गया। 1914 से 1918 तक चले इस युद्ध में करोड़ों लोग मारे गए।
दूसरा विश्व युद्ध
पहले विश्व युद्ध के बाद जर्मनी पर भारी जुर्माना और सख्त शर्तें लगा दी गईं। देश आर्थिक संकट में था। इसी माहौल में एडॉल्फ हिटलर (Adolf Hitler) सत्ता में आए। हिटलर ने जर्मनी को फिर से ताकतवर बनाने और अपनी सीमाएं बढ़ाने की ठानी। 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया। ब्रिटेन और फ्रांस ने तुरंत जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। धीरे-धीरे यह संघर्ष यूरोप से एशिया और अफ्रीका तक फैल गया।
दूसरा विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक चला। अंत में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जिसके बाद युद्ध समाप्त हुआ। इस युद्ध में पहले से भी ज्यादा तबाही हुई और दुनिया की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई।
क्या आज की स्थिति तीसरा विश्व युद्ध है?
आज के हालात जरूर चिंताजनक हैं। कई देश सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हैं। मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिख रहा है। लेकिन “विश्व युद्ध” कहने के लिए कुछ बातें जरूरी होती हैं।
दुनिया के बड़े देशों का औपचारिक रूप से दो बड़े सैन्य गुटों में बंट जाना, कई महाद्वीपों में एक साथ बड़े पैमाने पर जमीनी, हवाई और समुद्री युद्ध। लंबे समय तक चलने वाला व्यापक वैश्विक संघर्ष, फिलहाल ऐसा नहीं हुआ है। अभी संघर्ष सीमित क्षेत्रों तक केंद्रित है। बड़े देश सतर्क जरूर हैं लेकिन अधिकांश ने सीधे युद्ध की घोषणा नहीं की है।
विशेषज्ञ भी मौजूदा हालात को “तीसरा विश्व युद्ध” नहीं मानते। इसे गंभीर और खतरनाक क्षेत्रीय या बहु-देशीय संघर्ष जरूर कहा जा सकता है।
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