Maruti Flex Fuel Car: देश में पेट्रोल और डीजल के विकल्पों पर तेजी से काम हो रहा है, ताकि ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके और पर्यावरण को भी फायदा मिले। इसी दिशा में ऑटो सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 जून 2026 को पर्यावरण दिवस के मौके पर देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च की जा सकती है।
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी?
फ्लेक्स-फ्यूल कारें ऐसी गाड़ियां होती हैं जो पेट्रोल के साथ इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर भी चल सकती हैं। मौजूदा समय में भारत में अधिकतर वाहन E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक ही सक्षम हैं, लेकिन नई तकनीक वाली कारें E100 यानी पूरी तरह इथेनॉल पर चलने में सक्षम हो सकती हैं। इस तकनीक के लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में विशेष बदलाव किए जाते हैं ताकि इथेनॉल से किसी तरह का नुकसान न हो।
कौन सी कार हो सकती है लॉन्च?
जानकारी के अनुसार, इस तकनीक का प्रदर्शन पहले भी किया जा चुका है। पिछले साल एक ऑटो शो में एक एसयूवी का फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किया गया था, जो E85 तक के मिश्रण पर काम कर सकता है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इससे भी उन्नत मॉडल बाजार में आ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि यह नई तकनीक किसी लोकप्रिय मॉडल पर आधारित हो सकती है, जिसे पहले प्रोटोटाइप के तौर पर दिखाया गया था।
ये भी पढ़ें:
इथेनॉल का महत्व
इथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मानना है कि इसके बढ़ते उपयोग से देश की आयातित तेल पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।
फायदे और चुनौतियां
इस तकनीक को लेकर जहां एक तरफ पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से इसे फायदेमंद माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। देश में इथेनॉल फ्यूल पंपों की सीमित उपलब्धता और कीमत को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि लंबे समय में यह तकनीक अधिक किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर साबित हो सकती है।
आगे की दिशा
सरकार लगातार ऑटो कंपनियों को वैकल्पिक ईंधन तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में भारत में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।
ये भी पढ़ें:

