उत्तर प्रदेश डेस्क : प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट के यमुनानगर जोन के अंतर्गत आने वाले मेजा थाना क्षेत्र के बेदौली गांव में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। गांव के पास एक ईंट भट्ठे के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में बारिश का पानी भर जाने से बना अस्थायी तालाब चार मासूम बच्चों के लिए मौत का जाल बन गया। इसी तालाब में डूबकर चार बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।
घर से खेलने निकले थे मासूम
आपको बता दें कि मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे, गांव के चार छोटे बच्चे घर से खेलने के लिए निकले थे। जब देर शाम तक वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। पूरी रात गांव के लोग और पुलिस बच्चे खोजते रहे। बुधवार सुबह गांव के पास बने गड्ढेनुमा तालाब में चारों बच्चों के शव तैरते हुए नजर आए। यह दृश्य देख गांव में कोहराम मच गया।
खेलते-खेलते जा पहुंचे मौत के मुंह में
प्राथमिक जांच में पता चला है कि बच्चे खेलते हुए ईंट भट्ठे के उस हिस्से में पहुंच गए जहां खेतों से मिट्टी निकालने के कारण गहरे गड्ढे बन गए थे। इन गड्ढों में बारिश का पानी भर गया था और वे दिखने में एक तालाब जैसे हो गए थे। यही तालाब बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुआ। आशंका है कि खेलते समय वे इनमें फिसलकर गिर गए और डूबने से मौत हो गई।
इन मासूमों ने गंवाई अपनी जान
इस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान इस प्रकार हुई है…
-वैष्णवी (3 वर्ष) – हीरालाल की बेटी
-हुनर (5 वर्ष) – हीरालाल का बेटा
-केसरी (5 वर्ष) – संजय का बेटा
-कान्हा (5 वर्ष) – विमल का बेटा
चारों बच्चे एक ही मोहल्ले के थे और आपस में दोस्त थे। उनकी मौत से गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रशासन की मौजूदगी और जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही एसीपी मेजा संत प्रसाद उपाध्याय और मेजा थाना पुलिस मौके पर पहुंचे। बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। पुलिस ने कहा है कि यह हादसा प्रथम दृष्टया एक दुर्घटनावश डूबने का मामला लगता है। हालांकि, मामले की पूरी जांच की जा रही है। फिलहाल किसी आपराधिक एंगल के संकेत नहीं मिले हैं। मौके पर पुलिस बल तैनात है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
एक लापरवाही, चार जानें
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना सुरक्षा उपायों के खुले पड़े गड्ढे, खासकर बरसात के मौसम में, कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं। यदि इन गड्ढों को पहले ही ढंक दिया गया होता या वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जाते, तो शायद ये मासूम आज जीवित होते।

