चेन्नई (तमिलनाडु): चेन्नई की महिला अदालत ने सोमवार को अन्ना यूनिवर्सिटी यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी ज्ञानसेकरन को दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उसे 90,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला पिछले साल दिसंबर का है, जब ज्ञानसेकरन ने अन्ना यूनिवर्सिटी के परिसर में एक छात्रा का यौन उत्पीड़न किया था।
महिला अदालत की न्यायाधीश एम राजलक्ष्मी ने 28 मई को ज्ञानसेकरन को दोषी ठहराया था और उसके खिलाफ सभी 11 आरोपों में से प्रत्येक पर सजा सुनाई। सरकारी वकील मैरी जयंती ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला पहले ही एसआईटी द्वारा जांचा गया था और सभी आवश्यक सबूत अदालत में प्रस्तुत किए गए थे, जिससे इस मामले में सजा का फैसला हुआ। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में अन्ना यूनिवर्सिटी के परिसर में यह घटना हुई थी, जब आरोपी ज्ञानसेकरन ने एक द्वितीय वर्ष की छात्रा का यौन उत्पीड़न किया था। इस मामले की जांच के बाद, चेन्नई पुलिस ने ज्ञानसेकरन को गिरफ्तार किया था।
किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा: CM स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस मामले में शीघ्र न्याय दिलाने के लिए राज्य पुलिस, जांच अधिकारियों और सरकारी वकीलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने मामले को बहुत तेजी से निपटाया और केवल पांच महीने में न्याय सुनिश्चित किया। मुख्यमंत्री ने अपराधों को रोकने की दिशा में पुलिस को निर्देश भी दिए और यह साफ किया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों की आलोचना की, जिन्होंने इस घटना पर सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके पर आरोप लगाए थे। स्टालिन ने कहा कि विपक्ष “सस्ती राजनीति” कर रहा है और सरकार ने फैलाई जा रही “बदनामी” को खत्म किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हमेशा महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करेगी।
पलानीस्वामी ने फैसले का स्वागत किया
वहीं, विपक्ष के नेता एडप्पादी पलानीस्वामी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए आरोप लगाया कि डीएमके ने आरोपी गणसेकरन को बचाने की कोशिश की थी। पलानीस्वामी ने कहा, “डीएमके ने आरोपी को बचाने के लिए कई खेल खेले, लेकिन एआईएडीएमके ने विरोध प्रदर्शन कर यह सुनिश्चित किया कि आरोपी को सजा मिले। हम पीड़ितों की आवाज बने रहेंगे।”

