संगरूर: लुधियाना के बाद अब संगरूर जिले के स्कूलों में भी पीने के पानी की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। जिले में हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन के आदेश पर पिछले एक महीने में जिले के 68 स्कूलों से पीने के पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से आठ स्कूलों के सैंपल फेल पाए गए हैं।
-बच्चों की सेहत पर खतरा
इन 68 स्कूलों में 29 निजी और 39 सरकारी स्कूल शामिल थे। जांच में चार प्राइवेट और चार सरकारी स्कूलों के पानी के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतर सके। इस खुलासे से बच्चों की सेहत को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है।
सैंपल की जांच रीजनल वॉटर टेस्टिंग लैबोरेटरी, संगरूर में की गई, जिसके इंचार्ज डॉ. रमेश ने बताया कि दो मुख्य पैमानों पर ये पानी अस्वस्थ पाया गया है। कुछ स्कूलों में पानी टैंकों की नियमित सफाई नहीं की जा रही थी, वहीं अन्य स्कूलों में शुद्धिकरण प्रणाली (आरओ या अन्य) की जरूरत बताई गई है।
-डॉ. रमेश ने यह भी सुझाव दिया कि
सभी स्कूलों को साल में कम से कम दो बार पानी की जांच करवानी चाहिए, ताकि बच्चों और स्टाफ की सेहत से किसी तरह का समझौता न हो। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे भी अपने घर के पीने वाले पानी की साल में कम से कम एक बार टेस्टिंग जरूर करवाएं।
जिला प्रशासन ने उन स्कूलों को निर्देश दिए हैं जिनके सैंपल फेल पाए गए हैं, कि वे जल्द से जल्द अपने पानी टैंकों की सफाई कर दोबारा टेस्टिंग करवाएं और आवश्यकता होने पर पानी शुद्धिकरण सिस्टम लगवाएं। फिलहाल अन्य स्कूलों से भी सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि पूरे जिले में बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया जा सके। यह मामला सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी चेतावनी है। साफ पानी, स्वस्थ भविष्य की नींव है।

