नेशनल डेस्क: एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने गुरुवार को चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) का पदभार संभाल लिया। दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पदभार संभालने से पहले एयर मार्शल दीक्षित सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। उस भूमिका में उन्होंने उत्तर और मध्य भारत में वायुसेना की तैयारियों को मजबूत करने और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर ज़ोर दिया।
38 साल की सेवा और कई बड़ी जिम्मेदारिया
एयर मार्शल दीक्षित ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू शाखा में अपनी सेवा शुरू की थी। करीब चार दशक लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े पदों पर काम किया है। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बांग्लादेश के रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज से पढ़े हुए हैं। वह एक प्रशिक्षित उड़ान प्रशिक्षक और प्रायोगिक परीक्षण पायलट भी हैं। उन्होंने 20 से अधिक तरह के विमानों पर 3,300 घंटे से अधिक उड़ान भरी है, जिनमें मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर शामिल हैं।
सम्मान और पुरस्कार
– 2006 में मिराज स्क्वाड्रन में नेतृत्व के लिए वायु सेना पदक
– 2011 में एमएमआरसीए परीक्षणों में बेहतरीन कार्य के लिए विशिष्ट सेवा पदक
– देश की सेवा में असाधारण योगदान के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक, जो राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया
फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन और स्वदेशी परियोजनाओं में योगदान
उन्होंने मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और फ्रांस से नए विमानों को भारत लाने की प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने दक्षिण भारत के एक बड़े फाइटर ट्रेनिंग बेस की भी अगुवाई की, जिसे उनके नेतृत्व में बेस्ट बेस घोषित किया गया। बेंगलुरु स्थित ASTE में परीक्षण पायलट के रूप में उन्होंने जगुआर और मिग-27 जैसे विमानों के एवियोनिक्स अपग्रेड सहित कई स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में काम किया।

