बिहार डेस्क : बिहार में साल के अंत में विधानसभा का चुनाव होना है। इसके लिए सभी दल अपने चुनाव प्रचार में लगे हुए है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी चाहते है कि आने वाले समय में राज्य में उनकी सरकार बने। इसी चुनावी हलचल के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अजीत यादव ने राजद (RJD) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली है। उन्होंने अकेले नहीं, बल्कि अपने सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बीजेपी में शामिल होकर यह दिखा दिया कि अब राजद के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है। यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों की सक्रियता तेज हो गई है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
डॉ. दिलीप जायसवाल ने गर्मजोशी से किया स्वागत
आपको बता दें कि बीजेपी में शामिल होते ही प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने उनका और उनके समर्थकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अजीत यादव एक जाने-माने समाजसेवी हैं, जिनकी पहचान शाहाबाद और मगध क्षेत्र में बहुत मजबूत है। जायसवाल ने यह भी याद दिलाया कि डॉ. यादव के पिता सुरेश सिंह यादव पहले कांग्रेस से जुड़े थे और फिर लंबे समय तक राजद के वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे। उन्होंने नगर परिषद के चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। ऐसे परिवार की राजनीतिक विरासत का बीजेपी में आना पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
यादव समाज पर अब एक पार्टी का दावा नहीं
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपने भाषण में खास तौर पर यादव समाज का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज कुछ दल यह दावा करते हैं कि यादव समाज केवल उनके साथ है, लेकिन सच यह है कि बीजेपी में सबसे अधिक विधायक और सांसद यादव समुदाय से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता अब यादव समाज के हर घर तक पहुंचेंगे और उन्हें यह बताएंगे कि असली हितैषी बीजेपी है, जो उन्हें न सिर्फ सम्मान देती है, बल्कि नेतृत्व का अवसर भी देती है।
भगवान कृष्ण के वंशज BJP के साथ
इस मौके पर दिलीप जायसवाल ने एक भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के वंशज यानी यादव समाज, भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं और रहेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि बीजेपी ही एकमात्र पार्टी है जो यादव समाज को वास्तव में आगे बढ़ने का मौका देती है, ना कि सिर्फ नारेबाज़ी करती है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जाति के नाम पर वोट लेने वाले दल अब बेनकाब होंगे, क्योंकि यादव समाज का असली विकास बीजेपी ही कर सकती है।
यादव समाज को जोड़ने की कोशिश
भाजपा नेता ने इस बात को दोहराया कि पार्टी अब पूरे बिहार में यादव समाज के बीच जाकर यह स्पष्ट करेगी कि बीजेपी में उन्हें पूरा सम्मान और भागीदारी मिलती है। उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के नाम गिनाए जो यादव समाज से आते हैं और बीजेपी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब यादव समाज को यह समझना चाहिए कि बीजेपी ही उनका सच्चा साथी है।
राजनीतिक असर और संदेश
डॉ. अजीत यादव जैसे वरिष्ठ नेता का राजद छोड़कर बीजेपी में जाना निश्चित तौर पर एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। इससे यह साफ है कि राजद के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं और पार्टी के कुछ पुराने नेता अब विकल्प तलाश रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी इस मौके को भुनाकर सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश में है। खासकर यादव समाज में अपनी पकड़ को और मजबूत करना उसकी रणनीति का हिस्सा लग रहा है।

