पंजाब डेस्क: शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा का 89 वर्ष की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। उन्होंने मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे ढींडसा को 27 मई को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 28 मई को शाम 5:05 बजे कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन हो गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उन्हें निमोनिया और हृदय से संबंधित जटिल समस्याएं थीं, जो उम्र बढ़ने के साथ गंभीर होती चली गईं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा हरसंभव इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
-राजनीतिक सफर और विरासत
सुखदेव सिंह ढींडसा को पंजाब की राजनीति में एक दृढ़ और सुलझे हुए नेता के रूप में याद किया जाएगा। वे प्रकाश सिंह बादल के बाद अकाली दल के सबसे वरिष्ठ नेता माने जाते थे। उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार में अहम पदों की जिम्मेदारी निभाई। उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींडसा भी राज्य के वित्त मंत्री रह चुके हैं।
-धार्मिक सजा और सेवा भाव
ढींडसा का जीवन न सिर्फ राजनीति से जुड़ा रहा, बल्कि उन्होंने धार्मिक जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से निभाया। दिसंबर 2024 में श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफ करने और बेअदबी के मामलों को लेकर 10 दिन की धार्मिक सजा सुनाई थी। इस सजा के दौरान वे व्हीलचेयर पर बैठकर स्वर्ण मंदिर की पहरेदारी करते नजर आए। इसके अलावा उन्होंने पंजाब के प्रमुख गुरुद्वारों में सेवाएं दीं, हालांकि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से कुछ सेवाओं से उन्हें छूट दी गई थी।
-अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की रूपरेखा
उनका पार्थिव शरीर आज चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 30 मई की सुबह 8 बजे शवयात्रा चंडीगढ़ से रवाना होकर राजपुरा, पटियाला और भवानीगढ़ होते हुए संगरूर पहुंचेगी, जहां सुबह 10:30 से 11:00 बजे तक लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे। दोपहर 3 बजे उनके पैतृक गांव उभावाल, जिला संगरूर के लिए शवयात्रा निकाली जाएगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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