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‘आजम खान हमारी पार्टी की बुनियाद, भाजपा ने उन पर झूठे मुकदमे लगाए’, अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया

'We will one day eliminate EVMs', says Akhilesh Yadav ahead of 2027 elections

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नेशनल डेस्क: समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी और आजम खान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर भाजपा सरकार पर हमला बोला। अखिलेश ने कहा, “आजम खान समाजवादी पार्टी की बुनियाद हैं और वे पार्टी के सबसे पुराने नेताओं में से हैं। उन पर झूठे मुकदमे लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार चाहती है कि वह झूठे मुकदमों का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।”

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आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा हुए

आजम खान को लंबे समय तक विभिन्न आरोपों, जैसे डकैती और चोरी, में 100 से अधिक मुकदमों के चलते सीतापुर जेल में रखा गया था। वे 23 महीने जेल में रहने के बाद पिछले महीने, 23 सितंबर को जमानत पर रिहा हुए थे। इस दौरान अखिलेश यादव पहली बार आजम से मिलने के लिए रामपुर पहुंचे थे।

ओपी राजभर ने क्या कहा?

अखिलेश और आजम की मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव आजम खान को पार्टी से किनारे करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 23 महीने तक उनसे मिलने का कोई प्रयास नहीं किया। अब चुनाव करीब हैं, इसलिए अखिलेश को डर है कि आजम और शिवपाल मिलकर एक नई पार्टी न बना लें। यही कारण है कि वे अब आजम से मिलने पहुंचे हैं।”

मंत्री दयाशंकर सिंह का बयान

समाजवादी पार्टी के इस कदम पर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, “अखिलेश यादव को आजम खान से मिलने में बहुत देर हो गई है। आजम खान को जेल से छूटे हुए काफी समय हो चुका है, और अब अचानक मुलाकात करना सवाल उठाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेता होने के नाते उन्हें मिलना तो बनता था, लेकिन इसे लेकर समय पर कदम उठाया जाना चाहिए था।

मंत्री दानिश अंसारी की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश अंसारी ने भी अखिलेश और आजम की मुलाकात पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “जब आजम खान जेल में थे, तब समाजवादी पार्टी को उनकी याद नहीं आई, लेकिन अब चुनाव आ रहे हैं तो अखिलेश यादव मुसलमानों को गुमराह करने के लिए रामपुर पहुंच रहे हैं। यह केवल एक राजनीतिक स्टंट है। समाजवादी पार्टी केवल वोटों के लिए मुसलमानों को गुमराह करना चाहती है, जो लोग इस सब को समझ चुके हैं।” यह पूरी मुलाकात और उस पर की गई प्रतिक्रियाएं राजनीति में नए सवाल उठा रही हैं, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर।

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