Site icon Dainik Savera Times

भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा… RSS ने भाषा विवाद पर दिया जवाब

नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिन चलने वाली वार्षिक बैठक 6 जुलाई को खत्म हो गई। यह बैठक संगठन के प्रांत प्रचारकों के साथ हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें सिर्फ संघ के अंदरुनी कामकाज ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, भाषाई विवाद और संघ के 100 साल पूरे होने की तैयारियों को लेकर भी गहराई से विचार किया गया। वर्तमान में कई राज्यों में भाषा को लेकर विवाद हुआ है। इस पर संघ ने दोहराया कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा हैं और सभी का समान रूप से सम्मान होना चाहिए।
आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

मणिपुर और सीमावर्ती इलाकों की स्थिति

आपको बता दें कि बैठक में मणिपुर की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की गई। संघ के अनुसार, मणिपुर में वह लगातार शांति स्थापना के लिए काम कर रहा है और मैतेई समुदाय के बीच सहयोग भी बढ़ा है। इसके अलावा देश के सीमावर्ती इलाकों में संघ के प्रचारक किस तरह से समाज में काम कर रहे हैं, इस पर भी रिपोर्ट दी गई। सुरक्षा और सामाजिक मजबूती को लेकर इन इलाकों में संघ की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।

शिक्षा वर्गों में युवाओं की भागीदारी

संघ शिक्षा वर्ग, यानी प्रशिक्षण शिविर, इस बार बड़ी संख्या में लगाए गए। 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के लिए 75 शिविर लगाए गए जिनमें लगभग 18,000 लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 40 से 60 साल की उम्र वालों के लिए भी 25 शिविर लगाए गए। इसका मकसद समाज में सक्रिय, प्रशिक्षित और जिम्मेदार स्वयंसेवक तैयार करना है।

भाषाई विवाद पर संघ का रुख

हाल के दिनों में कई राज्यों में भाषा को लेकर विवाद हुआ है। इस पर संघ ने दोहराया कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय भाषा हैं और सभी का समान रूप से सम्मान होना चाहिए। संघ के अनुसार, हर किसी को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करने का अधिकार है और किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए।

जीवन मूल्यों और परिवार की अहमियत

बैठक में यह चिंता भी जताई गई कि तकनीकी विकास के साथ-साथ समाज में पारिवारिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। संघ का मानना है कि भारत की असली ताकत उसके सामाजिक और पारिवारिक मूल्य हैं और इन्हें जीवित रखना बेहद जरूरी है। इसीलिए पंचनिष्ठा यानी जीवन के हर पहलू में संतुलन बनाए रखने की सोच को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर

बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और विदेशों में हिंदू मंदिरों पर हुए हमलों पर भी चर्चा की गई। हालांकि, प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने साफ कहा कि इन मुद्दों पर कोई विशेष रणनीति तय नहीं की गई है। इस बार बैठक का मुख्य उद्देश्य संघ के शताब्दी वर्ष की योजनाएं और देशभर में जनसंपर्क को बढ़ाना था।

Exit mobile version