नई दिल्ली: सोमवार को लोकसभा में नया आयकर विधेयक (Income Tax Bill), 2025 बिना किसी बहस के पारित कर दिया गया। इस दौरान विपक्ष ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर बहस की मांग की, लेकिन हंगामे के बीच सरकार ने विधेयक पास करा लिया।
यह नया “आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025” पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। 1961 का कानून बहुत पुराना हो चुका था और उसमें समय-समय पर इतने बदलाव हो चुके थे कि उसकी भाषा और नियम आम करदाताओं के लिए समझना मुश्किल हो गया था। इसलिए सरकार ने इसे पूरी तरह से दोबारा लिखने (redraft) का फैसला किया। सरकार का कहना है कि नया कानून सरल, छोटा और स्पष्ट होगा, जिससे करदाताओं को रिटर्न भरने में आसानी होगी और कर विभाग को भी काम करने में सुविधा मिलेगी।
13 फरवरी, 2025 को सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 संसद में पेश किया था।इसके बाद यह विधेयक एक प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजा गया, जो संसद के सदस्यों की एक टीम होती है। समिति ने 21 जुलाई को अपनी 4,584 पन्नों की रिपोर्ट पेश की, जिसमें 566 सुझाव दिए गए। सरकार ने इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए पहला विधेयक वापस लिया और उसकी जगह संशोधित विधेयक (संख्या 2) सोमवार को दोबारा पेश किया और उसी दिन पास भी कर दिया।
विपक्ष की मांग थी कि बिहार में मतदाता सूची में चल रहे विशेष पुनरीक्षण पर संसद में बहस हो, लेकिन सरकार ने इसकी अनदेखी की और आयकर विधेयक पर कोई बहस न कराते हुए सीधे उसे पारित करा लिया। इसी को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया और संसद में हंगामा हुआ।
प्रवर समिति की सिफारिशों के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं। जटिल परिभाषाओं को साफ-साफ समझाने के लिए बदलाव। उन करदाताओं को भी रिफंड का अधिकार देने का सुझाव जो समय से थोड़ी देर से रिटर्न भरते हैं। MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) की परिभाषा को सरल और मौजूदा कानूनों से मेल खाने वाला बनाना। गैर-लाभकारी संस्थाओं (NGOs) के लिए ‘आय’ और ‘प्राप्तियाँ’ जैसे शब्दों को स्पष्ट करना। गुमनाम दान और अन्य विवादित प्रावधानों पर कानूनी स्पष्टता। भविष्य निधि (PF), टीडीएस, कम कर प्रमाणपत्र और अन्य तकनीकी मुद्दों पर कानून में सुधार के सुझाव।
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