नई दिल्ली: भारत सरकार ने चीन और ताइवान से आयात की जाने वाली प्लास्टिक प्रसंस्करण मशीनों पर 27% से 63% तक का एंटी-डंपिंग शुल्क (टैक्स) लगाने का फैसला किया है। यह कदम भारतीय घरेलू उद्योग को नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है।
एंटी-डंपिंग शुल्क क्या होता है?
जब कोई देश किसी उत्पाद को बहुत कम कीमत (डंपिंग प्राइस) पर दूसरे देश में बेचता है, यानी उस देश की घरेलू कीमत से भी सस्ता तो इससे उस देश के स्थानीय उत्पादकों को नुकसान होता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार एंटी-डंपिंग टैक्स लगाती है।
किन वस्तुओं पर लगा टैक्स?
चीन और ताइवान से आयात होने वाली प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीनें (Plastic Processing Machines) यह शुल्क उनके CIF मूल्य (Cost, Insurance, Freight) पर आधारित होगा, जो 27% से 63% के बीच रहेगा। शुल्क की दर इस बात पर निर्भर करेगी कि माल कहां से आ रहा है, कौन निर्यातक या निर्माता है।
कब तक लागू रहेगा यह टैक्स?
यह एंटी-डंपिंग शुल्क अधिसूचना जारी होने की तारीख से अगले 5 वर्षों तक लागू रहेगा। सरकार इसे जरूरत पड़ने पर रद्द, बदल या संशोधित कर सकती है।
सरकार ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने अपनी जांच में पाया कि चीन और ताइवान की कंपनियों ने भारत में मशीनें कम कीमत पर डंप की हैं। इससे भारतीय कंपनियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। इस वजह से यह टैक्स लगाना जरूरी हो गया है ताकि घरेलू उद्योग को राहत मिल सके। बताते चलें कि, भारत सरकार का यह कदम घरेलू उत्पादकों को विदेशी कंपनियों की अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए है। इससे स्थानीय उद्योग को मजबूती मिलेगी और न्यायपूर्ण व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
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