नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों प्रमुखों और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हाल ही में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की पूरी जानकारी दी। इस अहम मुलाकात में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद थे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सेना की तारीफ की
राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई पर सशस्त्र बलों की बहादुरी, समर्पण और सफलताकी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ देश की मजबूत नीति और साहसिक कदमों को दर्शाती है।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POJK) के भीतर 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS)की बैठक में फैसला किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए कहा कि, “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” उन्होंने कहा कि 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की एयर स्ट्राइक के बाद अब ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति का नया मानदंड है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से अब अगर कोई बातचीत होगी, तो वह केवल आतंकवाद और POK को खाली कराने पर होगी।

