नेशनल डेस्क: कैलिफोर्निया के समुद्र में सफल लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनके क्रू के अन्य सदस्य धरती पर लौट आए हैं। इस ऐतिहासिक पल पर उनके माता-पिता बेहद भावुक हुए और बेटे की सफलता पर गर्व महसूस किया। भारत भर में शुभांशु की सुरक्षित लैंडिंग पर खुशी का माहौल है, और इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को धरती पर वापस सुरक्षित लौटने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा, मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।
वायुमंडल से बाहर निकलने के बाद, यान के पैराशूट खोले गए, जो यान को धीरे-धीरे धीमा करके समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग करने में मदद करते हैं। इसके बाद पास में मौजूद रिकवरी टीम ने नौकाओं और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से शुभांशु और उनकी टीम को त्वरित चिकित्सा जांच के लिए उठाया।
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— SpaceX (@SpaceX) July 15, 2025
लैंडिंग के बाद, शुभांशु और उनकी टीम को 10 दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। इस दौरान उनके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे अंतरिक्ष के प्रभावों से पूरी तरह से उबर चुके हों। यह भारत के लिए एक गर्व का पल है, जो अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी उपलब्धियों को दर्शाता है।
#WATCH | Axiom-4 Mission | Lucknow, UP: Group Captain Shubhanshu Shukla’s family rejoices and celebrates as he and the entire crew return to the earth after an 18-day stay aboard the International Space Station (ISS) pic.twitter.com/S8TuJk95D7
— ANI (@ANI) July 15, 2025
मिशन के बारे में खुशखबरी ये भी है कि नासा के केंद्र के साथ ड्रैगन स्पेसयान का कम्युनिकेशन स्थापित हो गया है और अब यान धरती की ओर बढ़ रहा है। एक्सिओम स्पेस ने भी बताया कि सब कुछ सामान्य चल रहा है और शुभांशु शुक्ला और उनके अन्य क्रू सदस्य जल्द ही धरती पर सुरक्षित लैंडिंग करेंगे।

अंतरिक्ष यान ने “डी-ऑर्बिट बर्न” प्रक्रिया शुरू की है, जिसके तहत यान की गति को धीमा किया जाता है ताकि वह सुरक्षित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सके। इस प्रक्रिया में अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर्स (छोटे इंजन) को एक निश्चित दिशा में और समय पर दागा जाता है, जिससे यान का वेग घटता है और वह धरती पर सुरक्षित लैंड करता है। यह प्रक्रिया लगभग 18 मिनट तक चलती है।

शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम की इस ऐतिहासिक यात्रा ने भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है। उनके साहस और समर्पण ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। इस सफलता ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को और भी मजबूत किया है और भविष्य में ऐसे कई और मिशन के लिए दरवाजे खोले हैं।
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