Banke Bihar Corridor : नेशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश सरकार वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की धनराशि (फंड) का उपयोग कॉरिडोर विकास के लिए कर सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अनुमति देते हुए कहा कि वह इस धनराशि से कॉरिडोर के लिए मंदिर के आसपास पांच एकड़ भूमि खरीद सकती है। इससे भक्तों को दर्शन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। सरकार चाहती थी कि इस कॉरिडोर के लिए मंदिर के दान में जमा फंड का उपयोग किया जाए। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवंबर 2023 में इस पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश बदलते हुए सरकार को मंदिर के फंड से कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या कहता है?
- कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मंजूरी दी है कि वह मंदिर के पास 5 एकड़ जमीन खरीदे और वहां कॉरिडोर बनाए।
- यह जमीन मंदिर के देवता या ट्रस्ट के नाम पर ही रजिस्टर्ड की जाएगी, किसी निजी या सरकारी नाम पर नहीं।
- कोर्ट ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के पास पहले से ही फिक्स्ड डिपॉजिट में अच्छा पैसा है, जिसे इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोर्ट ने क्यों दिया यह फैसला?
- 2022 में बांके बिहारी मंदिर में भगदड़ की एक घटना हुई थी जिसमें कई श्रद्धालु घायल हुए थे।
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसी घटनाएं भक्तों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और व्यवस्था सुधारना जरूरी है।
- कोर्ट ने कहा कि कॉरिडोर बनाने से श्रद्धालुओं को आरामदायक और सुरक्षित दर्शन मिल सकेंगे।
Supreme Court permits Uttar Pradesh government to utilise funds from the Shri Banke Bihari Temple in Vrindavan to purchase five acres of land around the temple for corridor development.
Supreme Court orders that the acquired land shall be registered in the name of the deity.… pic.twitter.com/HWh85gG6CU
— ANI (@ANI) May 15, 2025
हाईकोर्ट ने क्यों किया था इनकार?
- हाईकोर्ट ने कहा था कि मंदिर का पैसा सार्वजनिक काम में नहीं लगाया जा सकता।
- लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कॉरिडोर खुद मंदिर और भक्तों के हित में है, इसलिए पैसा उपयोग में लाया जा सकता है।
कोर्ट ने किस पर ज़ोर दिया?
सरकार, मंदिर ट्रस्ट, स्थानीय लोगों और दूसरे संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा। केवल सरकार या कोई एक संस्था मथुरा-वृंदावन जैसे पवित्र क्षेत्रों का विकास अकेले नहीं कर सकती।
अन्य धार्मिक स्थानों पर भी होगा ध्यान
- यमुना नदी
- केशी घाट
- विश्राम घाट
- कुसुम सरोवर
- इन सभी स्थानों को भी सौंदर्यीकृत और संरक्षित करना जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
- मथुरा और वृंदावन भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जहां हर साल लाखों देशी-विदेशी श्रद्धालु आते हैं।
- भीड़ को देखते हुए यहां पर अच्छी सड़कों, पार्किंग, धर्मशालाओं और अस्पतालों की जरूरत है।
- यह फैसला इन क्षेत्रों को धार्मिक पर्यटन का बेहतर केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

