Dainik Savera Times

मान सरकार ने LAND POOLING POLICY वापस ली, विपक्ष और किसानों ने किया था विरोध

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने विवादास्पद लैंड पूलिंग नीति को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा इस नीति पर अस्थायी रोक लगाने और जनता के बढ़ते विरोध के बाद लिया गया है। उच्च न्यायालय ने सरकार को योजना की खामियों को दूर करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।

बता दें कि आज भी किसान लैंड पूलिंग योजना का विरोध कर रहे थे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस नीति में अनिवार्य सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का अभाव है, भूमिहीन मजदूरों और अन्य प्रभावित वर्गों के पुनर्वास का कोई प्रावधान नहीं है, कोई शिकायत निवारण तंत्र नहीं बनाया गया है और कोई समय-सीमा या बजट स्पष्ट नहीं किया गया है।

पिछले कुछ हफ्तों में, इस नीति के विरोध में किसान संघों, विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों द्वारा ट्रैक्टर मार्च, घर-घर अभियान और प्रदर्शन किए गए। विरोधियों ने दावा किया कि यह योजना “भूमि हड़पने” का एक प्रयास है जिसका कृषि और किसानों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

जन विरोध और कानूनी चुनौतियों के बीच, सरकार ने आखिरकार इस फैसले को वापस लेने की घोषणा कर दी है। इस कदम को राजनीतिक रूप से भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

पंजाब सरकार नियोजित शहरीकरण के लिए “लैंड पूलिंग” नीति लेकर आई है। इस योजना के तहत, पंजाब के 27 शहरों के लिए लगभग 40,000 एकड़ कृषि योग्य भूमि अधिग्रहित करने की योजना है। पंजाब सरकार इस अधिग्रहित भूमि पर आवासीय क्षेत्र विकसित करेगी, जिसे शहरी संपदा का नाम दिया गया है, लेकिन किसान संगठनों का आरोप है कि यह नीति उन्हें उनकी उपजाऊ भूमि से बेदखल करने और रियल एस्टेट परियोजनाओं को बढ़ावा देने की एक साजिश है।

Exit mobile version