नेशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित शाही जामा मस्जिद में हरिहर मंदिर होने के दावे के मामले में मस्जिद कमेटी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से झटका मिला है। एएसआई द्वारा सर्वे कराए जाने के आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी की ओर हाई कोर्ट में दाखिल रिवीचन याचिका खारिज हो चुकी है, जिससे मस्जिद के सर्वे का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर को लेकर विवाद चल रहा है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जामा मस्जिद उस जगह पर बनी है जहाँ पहले एक प्राचीन हरिहर मंदिर था। उनका दावा है कि मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है, और वे वहाँ फिर से पूजा करना चाहते हैं।
कोर्ट में मामला कैसे पहुँचा?
इस विवाद को लेकर हिन्दू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन और सात अन्य लोगों ने अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने माँग की थी कि इस जगह का ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) से सर्वे कराया जाए, जिससे यह पता चल सके कि वहाँ पहले मंदिर था या नहीं।
संभल की निचली अदालत का आदेश
संभल की सिविल कोर्ट ने ASI को उस जगह का सर्वे करने की अनुमति दे दी थी। यानी कोर्ट ने कहा था कि ASI को वहाँ जाकर जांच करनी चाहिए कि क्या वहाँ कभी मंदिर था।
मस्जिद कमेटी ने हाई कोर्ट का रुख किया
मस्जिद कमेटी इस फैसले से सहमत नहीं थी। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका लगाई और सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यह मामला कानूनी रूप से सही नहीं है और कोर्ट को इसमें दखल देना चाहिए।
13 मई को सुनवाई पूरी, 19 मई को फैसला
हाई कोर्ट ने 13 मई को इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली थी और कहा था कि वह जल्द ही फैसला सुनाएगा। आज यानी 19 मई, सोमवार को हाई कोर्ट ने फैसला सुना दिया।
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की, सर्वे पर रोक नहीं
हाई कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी है। इसका मतलब यह है कि अब ASI सर्वे कर सकती है। कोर्ट ने साफ कहा कि सर्वे पर कोई रोक नहीं लगेगी।
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