नेशनल डेस्क : BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) अभ्यर्थी एक बार फिर से पटना में धरना प्रदर्शन करने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। पिछले कुछ समय से अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और अब एक बार फिर से उनका आंदोलन तेज हो चुका है। बता दें कि सोमवार को मुसल्लहपुरहाट से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का हुजूम गर्दनीबाग धरना स्थल के लिए निकला। इस आंदोलन में प्रमुख रूप से खान सर भी शामिल हैं। खान सर ने अब खुलकर छात्रों के आंदोलन में भाग लिया है और दावा किया है कि उनके पास बीपीएससी परीक्षा में धांधली के साक्ष्य मौजूद हैं। यह दावा छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है।
खान सर का समर्थन
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए बिहार के खान सर भी मैदान में उतर चुके हैं। खान सर, जिन्हें चाणक्य और विश्व गुरु के नाम से जाना जाता है, ने अपनी लोकप्रियता और प्रभाव का इस्तेमाल कर छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई है। उनका समर्थन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत साबित हो सकता है। वे हमेशा छात्रों के हित के लिए वर्तमान सरकार के साथ लड़ते हुए नजर आते है।
छात्रों की मुख्य मांग
दरअसल, छात्रों का आरोप है कि 13 दिसंबर को बापू परीक्षा केंद्र पर आयोजित बीपीएससी की परीक्षा में बड़ी धांधली और अनियमितताएं हुई हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान कई गड़बड़ियां हुईं, जो पूरी परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं। उन्होंने इस मामले की जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग की है। छात्रों की मुख्य मांग है कि BPSC 70वीं प्री परीक्षा को रद्द कर दिया जाए। वे चाहते हैं कि इस परीक्षा को फिर से आयोजित किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
आंदोलन का उद्देश्य
BPSC अभ्यर्थी इस आंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज़ प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं और इस मुद्दे को हल करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान छात्रों का उद्देश्य है कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाए और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
खान सर का बड़ा दावा
खान सर ने एक बड़ा दावा किया है कि उनके पास इस धांधली से संबंधित एक वीडियो भी है। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को उच्च न्यायालय में ले जाएंगे और उन्हें मुकदमा जीतने का पूरा भरोसा है। खान सर के इस कदम से छात्रों का उत्साह और बढ़ सकता है और प्रशासन पर दबाव भी बढ़ सकता है। इस आंदोलन के बावजूद, सरकार या बीपीएससी आयोग की तरफ से अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और यह आंदोलन पटना में एक नई चुनौती पैदा कर सकता है।

