Last Updated: October 2, 2026

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केंद्र ने पहलगाम हमले पर नई समिति गठित करने से किया इनकार, कहा- नहीं बनेगी कारगिल जैसी समिति

June 11, 2025

केंद्र ने पहलगाम हमले पर नई समिति गठित करने से किया इनकार, कहा- नहीं बनेगी कारगिल जैसी समिति

नेशनल डेस्क : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में कई लोगों की जान गई और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल खड़े हुए। विपक्षी पार्टियों, खासकर कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले को “आंतरिक सुरक्षा की बड़ी विफलता” बताया और केंद्र सरकार से इस पर विस्तृत जांच कराने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार समीक्षा करने के लिए एक नई समिति का गठन करें, लेकिन केंद्र ने विपक्ष की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

CM ममता और कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

आपको बता दें कि ममता बनर्जी ने केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब इतना बड़ा हमला हुआ है तो सरकार को सिर्फ बयान देने की बजाय जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वहीं कांग्रेस ने यह सुझाव दिया कि जिस तरह 1999 में कारगिल युद्ध के बाद सुब्रह्मण्यम समिति बनाई गई थी, वैसे ही एक नई उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए, जो सुरक्षा चूक की समीक्षा करे।

कारगिल के बाद क्या हुआ था?

दरअसल, 1999 में कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने के. सुब्रह्मण्यम के नेतृत्व में एक समिति गठित की थी। इस समिति ने सेना, खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था में जो खामियां थीं, उनकी समीक्षा कर कई सिफारिशें दी थीं। इन सिफारिशों के आधार पर गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह (Group of Ministers – GoM) बना था। इस समूह में देश के वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री शामिल थे, और इसी के बाद कई बड़े बदलाव किए गए जैसे…

-खुफिया एजेंसियों का समन्वय बेहतर हुआ

-चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति की सिफारिश की गई

-सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए गए


कोई नई समिति नहीं बनेगी

अब जबकि पहलगाम हमला हुआ है, विपक्ष चाहता है कि वैसी ही कोई समिति बनाई जाए जो जांच कर यह बताए कि क्या चूक हुई। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोई नई समिति गठित नहीं करेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कारगिल समिति की सिफारिशों पर आधारित है, और इसमें समय-समय पर आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में सरकार को नहीं लगता कि नई समिति बनाना जरूरी है।

विपक्ष का मानना है कि आतंकी हमले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच ज़रूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमले रोके जा सकें। लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा ढांचा पहले से काफी मजबूत है और वही पर्याप्त है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विपक्ष इस पर आगे क्या कदम उठाता है।

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