China-Russia Iran Issue: संयुक्त राष्ट्र: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब देखने को मिला जब पाकिस्तान ने ईरान पर अमेरिका के हालिया हमलों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खुलकर विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक मंच पर अमेरिका-पाकिस्तान के संभावित नजदीकी रिश्तों की अटकलों पर विराम लगा दिया है और चीन-रूस के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी को रेखांकित कर दिया है।
हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात ने संकेत दिए थे कि इस्लामाबाद और वाशिंगटन के रिश्ते एक नई दिशा में बढ़ सकते हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर सबको चौंका दिया।
पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद में एक आपात बैठक के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा, “ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन हैं। पाकिस्तान इस कदम की घोर निंदा करता है।”
अहमद ने यह भी बताया कि पाकिस्तान, चीन और रूस के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद में एक संयुक्त प्रस्ताव ला रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान पर हमलों की वैश्विक स्तर पर निंदा करना और भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों को रोकना है।
बैठक में उन्होंने जोर देकर कहा कि फोडरे, नतांज और इस्फाहान में स्थित परमाणु स्थलों पर अमेरिका द्वारा की गई बमबारी न केवल ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सुरक्षा गारंटी पर भी सीधा हमला है।
इस कूटनीतिक रुख से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान अब अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन के बजाय निर्णायक और स्वतंत्र रुख अपनाने को तैयार है। पाकिस्तान ने इस बयान में इजरायल के कथित सहयोग की भी कड़ी निंदा की और ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार को पूरी तरह से समर्थन देने की बात दोहराई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान का यह कदम दक्षिण एशिया में बदलती भू-राजनीतिक रणनीति की झलक है, जिसमें वह पारंपरिक साझेदारों से परे जाकर अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय ले रहा है।
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