नेशनल डेस्क : पूर्वी एशिया में एक बार फिर तनाव का माहौल पैदा हो गया है। चीन और जापान ने एक-दूसरे पर पूर्वी चीन सागर के विवादित द्वीपों के पास हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने का आरोप लगाया है। मामला तब बढ़ा जब एक चीनी हेलीकॉप्टर कथित रूप से जापानी नियंत्रण वाले सेनकाकू द्वीप समूह के पास जापान के हवाई क्षेत्र में घुस आया।
चीन का हेलीकॉप्टर जापानी हवाई सीमा में…
दरअसल, जापान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को चीन की एक तटरक्षक नौका से उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर दोपहर करीब 12:20 बजे सेनकाकू द्वीपों के पास जापान की हवाई सीमा में घुस गया। यह हेलीकॉप्टर करीब 15 मिनट तक क्षेत्र में बना रहा। जापानी तटरक्षक बल ने तुरंत इसका जवाब दिया और वायु आत्मरक्षा बल ने दो जेट फाइटर विमानों को भेजा। जापान ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और चीन के राजदूत को बुलाकर कड़ा विरोध जताया।
चीन का पलटवार, जापान पर भी आरोप
दूसरी ओर, चीन ने भी दावा किया कि जापान का एक नागरिक विमान चीन के हवाई क्षेत्र में घुसा और बीजिंग ने भी टोक्यो के खिलाफ विरोध जताया है। चीन ने कहा कि वह जापान की इस कार्रवाई से “गंभीर रूप से असंतुष्ट” है और इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन इन द्वीपों को ‘दियाओयू’ कहता है और उन पर अपना हक जताता है।
क्यों है सेनकाकू/दियाओयू द्वीप विवाद का कारण ?
पूर्वी चीन सागर में स्थित सेनकाकू द्वीप समूह (चीन में दियाओयू) प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हैं और सामरिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माने जाते हैं। यह द्वीप समूह फिलहाल जापान के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन चीन भी इस पर अपना अधिकार जताता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच अक्सर इन क्षेत्रों में नौसेना और हवाई गतिविधियों को लेकर टकराव होता है।
क्या है आगे की स्थिति ?
इस घटनाक्रम के बाद पूर्वी चीन सागर में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। जापान और चीन दोनों ही देशों ने अपने-अपने बयानों में एक-दूसरे से गंभीर नाराजगी जताई है। चीन और जापान के बीच पहले से ही समुद्री सीमाओं को लेकर विवाद चल रहा है, और इस नई घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को और उलझा दिया है।
यह हालिया विवाद एशिया में शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। सेनकाकू/दियाओयू द्वीपों को लेकर चल रही यह तनातनी आगे और बढ़ सकती है, अगर दोनों देश आपसी बातचीत और समझ से मामले को नहीं सुलझाते। ऐसे में क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी अहम हो जाती है

