
चंडीगढ़: पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर माहौल गरमा गया है। 7 मई को किसानों द्वारा रेलवे ट्रैक जाम करने की चेतावनी के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सख्त रुख अपनाया है। जिसे लेकर पंजाब सरकार ने कहा कि आम जनता को परेशान करने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़कों को जाम करना, ट्रेनों को रोकना या लोगों की दैनिक ज़िंदगी को बाधित करना, राज्य की जनता के खिलाफ कदम माना जाएगा और इसके लिए कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਸੜਕਾਂ ਰੋਕਣ ਜਾਂ ਰੇਲਾਂ ਰੋਕਣ ਜਾਂ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਤੰਗ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਅਤੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਕਾਰਾਂ ਚ ਵਿਘਨ ਪਾਉਣ ਵਾਲੇ ਕੋਈ ਵੀ ਐਲਾਨ,ਧਰਨੇ ਜਾਂ ਹੜਤਾਲਾਂ ..ਪਬਲਿਕ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਮੰਨੇ ਜਾਣਗੇ..ਸਾਰੀਆਂ ਸੰਸਥਾਵਾਂ, ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਅਤੇ ਯੂਨੀਅਨਾਂ ਧਿਆਨ ਦੇਣ..ਵਿਰੋਧ ਕਰਨ ਦੇ ਹੋਰ ਵੀ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਸਿਰਫ਼ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਤੰਗ…
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) May 5, 2025
-किसान नेताओं की मांगें और नाराजगी
दरअसल, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने हाल ही में आरोप लगाया था कि सरकार किसानों की करोड़ों रुपये की ज़मीन को कौड़ियों के भाव खरीद रही है और जो किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं, उनके साथ अन्याय हो रहा है। इसी के विरोध में 7 मई को अमृतसर के देवीदासपुरा में दोपहर 12 बजे रेलवे ट्रैक जाम करने की घोषणा की गई है। किसान नेताओं ने सभी किसानों से इस विरोध में शामिल होने की अपील की है।
-नजरबंदी और आंदोलन की तैयारी
इसी बीच, सरकार की कार्रवाई तेज होती नजर आ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा द्वारा 6 मई को शंभू पुलिस स्टेशन के घेराव की योजना बनाई गई थी, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल को नजरबंद कर दिया। पुलिस अधिकारी सोमवार तड़के 4 बजे उनके फरीदकोट स्थित घर पहुंचे। दल्लेवाल ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इस कार्रवाई की जानकारी दी और सरकार पर आंदोलन को जबरन दबाने का आरोप लगाया।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध के अधिकारों का हनन कर रही है और किसान नेताओं को बिना किसी वार्ता के हिरासत में लिया जा रहा है।
-टकराव की आशंका
कृषि आंदोलन के इस नए चरण में सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री के सख्त संदेश और पुलिस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था में किसी तरह की ढील नहीं देना चाहती। वहीं, किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब सबकी निगाहें 7 मई पर टिकी हैं, जब अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर किसानों के विरोध का ऐलान किया गया है। क्या सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई बातचीत होगी या हालात और बिगड़ेंगे—यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
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