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Pahalgam Terror Attack : हमले से पहले पहलगाम में ही था CRPF जवान, पैसों के लिए देता था PAK खुफिया विभाग को जानकारी

May 27, 2025

Pahalgam Terror Attack : हमले से पहले पहलगाम में ही था CRPF जवान, पैसों के लिए देता था PAK खुफिया विभाग को जानकारी

नेशनल डेस्क : पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर एक नई और अहम जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के एक जवान को गिरफ्तार किया गया है। इस हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जवान हमले से पहले ही पहलगाम में था और उस पर जासूसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

पाकिस्तान  को जानकारी देता था CRPF जवान 

आपको बता दें कि पाहलगाम में 22 अप्रैल 2024 को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने इस हमले से कुछ दिन पहले सीआरपीएफ जवान मोती राम जाट को गिरफ्तार किया है। मोती राम जाट पर पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों (पीआईओ) को भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने का आरोप है।

2023 से PAK को जानकारी दे रहा था जवान 

दरअसल, सीआरपीएफ जवान मोती राम जाट पर यह आरोप है कि वह पिछले कुछ समय से जासूसी गतिविधियों में शामिल था। 2023 से वह पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों को भारत की गोपनीय जानकारी भेज रहा था। जवान के इस कार्य के बदले उसे कई माध्यमों से पैसे भी मिल रहे थे।

आरोपी जवान की गिरफ्तारी कैसे हुई?

जवान की गिरफ्तारी एक गहरी निगरानी और जांच के बाद हुई। सीआरपीएफ ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से जांच की और पाया कि वह नियमों का उल्लंघन कर रहा था। इसके बाद, सीआरपीएफ ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में आरोपी जवान को बर्खास्त कर दिया गया है।

पाहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना की कार्रवाई

पाहलगाम आतंकी हमले का बदला भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए लिया। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-आधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया और उन्हें तबाह कर दिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना को इस हमले का करारा जवाब दिया। इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने सीजफायर की गुहार लगाई, जिससे यह साबित होता है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मजबूर कर दिया था। यह मामला देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जहां पर एक जवान ही अपनी राष्ट्रधर्मिता से मुंह मोड़कर दुश्मन की मदद कर रहा था। यह भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही यह दर्शाता है कि भारतीय एजेंसियां किस प्रकार से अपनी सक्रियता बनाए रखते हुए इन मामलों पर पैनी नजर रखती हैं।

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