इंटरनेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इस दौरे पर वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और जिनपिंग की यह मीटिंग इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इस समय अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर तनाव चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है, जबकि चीन को कुछ राहत दी है। ऐसे में भारत-चीन की नजदीकी ट्रंप को अच्छी नहीं लगेगी।
भारत-चीन रिश्तों की पृष्ठभूमि
भारत और चीन ने 1950 में राजनयिक संबंध शुरू किए थे, लेकिन 1962 के युद्ध ने इन रिश्तों को गहरी चोट पहुंचाई। इसके बाद 1988 में राजीव गांधी की चीन यात्रा से रिश्तों में सुधार की शुरुआत हुई। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की यात्रा से दोनों देशों के बीच “विशेष प्रतिनिधि प्रणाली” बनी। 2005 में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा से रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा मिला। 2014 में शी जिनपिंग भारत आए, जिससे विकास आधारित साझेदारी की नींव रखी गई।
2015 में मोदी चीन गए और रिश्तों को और गति मिली। 2018 (वुहान) और 2019 (चेन्नई) में हुए अनौपचारिक शिखर सम्मेलनों ने आपसी विश्वास बढ़ाया। हालांकि, 2020 में लद्दाख सीमा विवाद ने रिश्तों में खटास ला दी थी। 2024 में रूस (कजान) में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात से रिश्तों में फिर सुधार दिखा।
मौजूदा हालात
हाल ही में चीन ने भारत को सुरंग खोदने वाली मशीन और रेयर अर्थ मटेरियल देने का भरोसा जताया है। इस मुलाकात से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।

