चंडीगढ़: पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम अब जनआंदोलन के रूप में फैलती जा रही है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के लोग न केवल इस लड़ाई का हिस्सा बन रहे हैं, बल्कि सरकार के साथ मिलकर नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांव और वार्ड स्तर पर गठित समितियों से जुड़ रहे हैं।
-सरकार की प्रतिबद्धता
रविवार को पटियाला में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने नशे के खिलाफ चल रही इस मुहिम को और गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गांवों और वार्डों में बनी नशा विरोधी समितियों को शपथ दिलाई कि वे अपने-अपने क्षेत्र को नशामुक्त बनाने में पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहेंगे। इस अवसर पर स्थानीय विधायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
-गांवों में जागरूकता का अभियान
चीमा ने कहा कि अब वह समय दूर नहीं जब पंजाब पूरी तरह से नशामुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार सीमा पर आने वाले नशे पर कड़ी निगरानी रख रही है और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के साथ समन्वय कर रही है। इस पहल का उद्देश्य न केवल तस्करी की रोकथाम करना है, बल्कि नशे के स्रोतों को पूरी तरह से नष्ट करना है।
-स्वास्थ्य मंत्री का संदेश
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने नशे के शिकार युवाओं के इलाज के लिए राज्य के सभी अस्पतालों में उचित दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। उनका कहना था कि नशा छोड़ने की इच्छा रखने वाले युवाओं को न केवल उपचार मिल रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार की दिशा में भी सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जिन युवाओं को पहले नशे के लिए इंजेक्शन की लत थी, अब वे दवाइयां नहीं ले पा रहे, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है और उनकी जान भी सुरक्षित है।
-नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई
पंजाब सरकार ने नशे के तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य पुलिस ने कई तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके घरों को भी ध्वस्त किया है। इस कदम का उद्देश्य तस्करी के रास्तों को बंद करना और नशे के कारोबार में शामिल व्यक्तियों को कड़ी सजा दिलवाना है।
-जनभागीदारी और आगामी चुनौतियां
जनआंदोलन का हिस्सा बने लोग अब केवल जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नशे के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ इस व्यापक और समर्पित मुहिम को यदि इसी प्रकार की जनभागीदारी मिलती रही, तो पंजाब को नशामुक्त बनाने का सपना जल्द ही पूरा हो सकता है।
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