नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की सतर्कता इकाई (Vigilance Unit) ने गोविंदपुरी थाने में तैनात सहायक उपनिरीक्षक (ASI) सुशील शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ASI शर्मा ने एक परिवार का नाम आपराधिक केस से हटाने के बदले में रिश्वत की मांग की थी। इस पूरे मामले में एक चाय विक्रेता को भी गिरफ्तार किया गया है, जो ASI का सहयोगी था। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से..
5,000 रुपये की रिश्वत की मांग…
आपको बता दें कि यह मामला तब सामने आया जब एक दिहाड़ी मजदूर ने शिकायत की कि ASI सुशील शर्मा पहले ही उससे ₹5,000 ले चुका है। यह रकम शर्मा ने एक झगड़े और हमले के केस की जांच में परिवार का नाम हटाने के बदले मांगी थी। लेकिन इसके बाद जब एएसआई ने फिर से 5,000 रुपये की अतिरिक्त रिश्वत मांगी, तो पीड़ित ने सतर्कता इकाई से संपर्क किया।
पकड़ने के लिए बिछाया गया जाल
दरअसल, शिकायत के बाद सतर्कता विभाग ने एक स्ट्रिंग ऑपरेशन (जाल) रचाया। योजना के अनुसार, पीड़ित ने तय राशि एक चायवाले को सौंपी, जो इस पैसे को थाने के अंदर ASI को देता था। जैसे ही यह पैसा ASI को सौंपा गया, सतर्कता टीम ने तुरंत शर्मा और चायवाले दोनों को गिरफ्तार कर लिया। बरामद की गई राशि एएसआई शर्मा की जेब से मिली, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
सिस्टम में भ्रष्टाचार, लेकिन अब कार्रवाई तेज
इन मामलों से साफ है कि पुलिस महकमे में रिश्वतखोरी की समस्या अब भी गंभीर है। लेकिन साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि सतर्कता इकाइयाँ और भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियाँ सक्रिय हो चुकी हैं और अब ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो रही है। इससे आम जनता को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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