नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जोरदार खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में मतदाता सूची में हेरफेरी की गई है। फडणवीस ने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस की हार की हताशा का परिणाम बताया और इसे पूरी तरह से गलत बताया।
फडणवीस का राहुल गांधी पर पलटवार
राहुल गांधी के एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किए गए पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने लिखा, “झूठ बोले कौवा काटे, काले कौवे से डरो… राहुल गांधी, यह साफ है कि महाराष्ट्र में आपकी पार्टी की हार का दुख दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।” फडणवीस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जहां कांग्रेस या उसके सहयोगियों ने चुनाव जीते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आप कब तक अंधेरे में तीर चलाते रहेंगे? आपकी जानकारी के लिए, महाराष्ट्र के 25 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में 8% से ज्यादा मतदाता वृद्धि देखी गई, और इन क्षेत्रों में कांग्रेस ने कई सीटें जीती हैं।”
फडणवीस ने महाराष्ट्र के कुछ विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहां मतदाता वृद्धि हुई और कांग्रेस ने जीत हासिल की:
पश्चिम नागपुर: 7% वृद्धि (27,065 मतदाता) – कांग्रेस के विकास ठाकरे जीते।
उत्तरी नागपुर: 7% वृद्धि (29,348 मतदाता) – कांग्रेस के नितिन राउत जीते।
पुणे (वडगांव शेरी): 10% वृद्धि (50,911 मतदाता) – शरद पवार गुट के बापू पठारे जीते।
मलाड पश्चिम: 11% वृद्धि (38,625 मतदाता) – कांग्रेस के असलम शेख जीते।
मुम्ब्रा: 9% वृद्धि (46,041 मतदाता) – शरद पवार गुट के जितेंद्र आव्हाड जीते।
फडणवीस ने आगे कहा, “बेहतर होता कि आप यह ट्वीट पोस्ट करने से पहले अपने पार्टी के सहयोगियों, जैसे असलम शेख, विकास ठाकरे और नितिन राउत से बात करते। इससे कम से कम कांग्रेस के अंदर संवादहीनता इतनी स्पष्ट नहीं होती।”
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को भेजा आमंत्रण
इस बीच, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने राहुल गांधी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से जुड़े आरोपों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। यह पत्र 12 जून को ईमेल के माध्यम से भेजा गया था। राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया था, खासकर जब चुनाव आयोग ने चुनावों के वीडियो फुटेज को सुरक्षित रखने के दिशा-निर्देशों में बदलाव किया था। उनका आरोप था कि इस बदलाव से सबूतों को नष्ट किया जा सकता है, जो चुनावों की अखंडता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है और दावा किया है कि सबूतों को संरक्षित किया जाएगा।