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‘आने वाले दशकों में यहीं से राष्ट्र की दिशा तय होगी’, कर्तव्य भवन के उद्घाटन समारोह में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में बने कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया और वहां आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह इमारत सिर्फ एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण का केंद्र होगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “कर्तव्य भवन सिर्फ एक नाम नहीं, यह करोड़ों देशवासियों के सपनों को साकार करने की तपोभूमि है।”

यहीं से लिए जाएंगे देश के बड़े फैसले: पीएम मोदी

उन्होंने बताया कि आने वाले दशकों तक देश के बड़े फैसले यहीं से लिए जाएंगे, और यही से भारत की नीतियां तैयार होंगी। प्रधानमंत्री ने इस भवन को “कर्तव्य भवन” नाम देने की वजह बताते हुए कहा कि यह नाम लोकतंत्र और संविधान के मूल मूल्यों का प्रतीक है।

कर्तव्य ही आरंभ है, कर्तव्य ही प्रारब्ध

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “कर्तव्य ही आरंभ है, कर्तव्य ही प्रारब्ध है। करुणा और कर्मणता के स्नेहसूत्र में बंधा कर्म – यही है कर्तव्य।” उन्होंने कहा कि जैसे नया संसद भवन, भारत मंडपम, कर्तव्य पथ और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक देश के आत्मगौरव के प्रतीक हैं, वैसे ही कर्तव्य भवन भी एक आधुनिक भारत की सोच और संकल्प का प्रतीक है।

 

पुरानी इमारतों में चलती रही प्रशासनिक व्यवस्था 

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, ”आज़ादी के बाद भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था लंबे समय तक ब्रिटिश काल की पुरानी और असुविधाजनक इमारतों में चलती रही। इन इमारतों में न तो पर्याप्त जगह थी, न रोशनी और न ही वेंटिलेशन।भारत सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 अलग-अलग स्थानों से संचालित हो रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर मंत्रालय किराए के भवनों में चल रहे हैं, जिन पर सालाना डेढ़ हज़ार करोड़ रुपये का खर्च आता है। यह राशि केंद्र सरकार सिर्फ़ किराया चुकाने में ही खर्च कर रही है। कई और कर्तव्य भवन भी बनाए जा रहे हैं।”

समग्र दृष्टिकोण के साथ आकार ले रहा भारत 

पीएम मोदी ने कहा, ”भारत एक समग्र दृष्टिकोण के साथ आकार ले रहा है, जहां प्रगति हर क्षेत्र तक पहुंच रही है। देश में 30,000 से ज़्यादा पंचायत भवन बनाए जा चुके हैं। गरीबों के लिए चार करोड़ से ज़्यादा पक्के घर बनाए जा चुके हैं। देश में 300 से ज़्यादा नए मेडिकल कॉलेज भी बनाए गए हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आइए हम सब मिलकर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएं और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत की सफलता की कहानी लिखें।”

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