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DRDO ने ड्रोन से दागी जाने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण किया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को, भारत ने एक ऐसी मिसाइल का सफल परीक्षण किया जिसे ड्रोन (UAV) के ज़रिए दुश्मन के ठिकानों पर दागा जा सकता है। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित राष्ट्रीय मुक्त क्षेत्र रेंज (National Open Air Range – NOAR) में किया गया। इस मिसाइल का नाम है यूएवी लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM)-V3। यह एक सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइल है, जो दुश्मन के छोटे-बड़े ठिकानों को बहुत सटीकता से तबाह कर सकती है।

रक्षा मंत्री ने DRDO को दी बधाई 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी और इस सफलता के लिए DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और उसके उद्योगिक साझेदारों, MSMEs और स्टार्ट-अप्स को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह सफलता दिखाती है कि अब भारतीय उद्योग भी आधुनिक और अहम रक्षा तकनीकें खुद बना सकता है। ये हमारे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देता है।”

 

मई 2025 में भी हुए थे बड़े परीक्षण

इससे पहले मई महीने में, भारतीय सेना ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बड़े रक्षा परीक्षण किए थे। इनमें पोखरण, बबीना, जोशीमठ, आगरा और गोपालपुर जैसे स्थान शामिल थे। इन परीक्षणों का मकसद था- युद्ध जैसी स्थिति में रक्षा सिस्टम को परखना, नई तकनीकों का उपयोग करना और आत्मनिर्भर भारत के तहत बनी देशी तकनीकों का प्रदर्शन करना शामिल। 27 मई को थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुद बबीना रेंज जाकर इन परीक्षणों की समीक्षा की और सभी शामिल विशेषज्ञों से बात की।

किन तकनीकों का परीक्षण हुआ?

इन परीक्षणों में कई अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकों को परखा गया, जैसे:
-मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS)
-ड्रोन से छोड़ी जाने वाली गाइडेड मिसाइल (ULPGM)
-स्वतंत्र रूप से उड़ने वाले ड्रोन (Runway Independent RPAS)
-ड्रोन रोधी तकनीकें (Counter-UAS)
-Loitering म्यूनिशन
-ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम (IDDIS)
-इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
-नई पीढ़ी का वीएसएचओआरएडीएस मिसाइल सिस्टम

इन सभी प्रयासों का उद्देश्य है भारत की सेनाओं को नई और स्वदेशी तकनीकों से मजबूत बनाना, ताकि किसी भी स्थिति में तेज़ी से जवाब दिया जा सके।

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