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शराब घोटाले में ED का बड़ा एक्शनः पूर्व CM भूपेश बघेल का बेटा चैतन्य गिरफ्तार

नेशनल डेस्क। छत्तीसगढ़ के राजनीति से जुड़ी बड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जहां, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार सुबह ईडी की टीम ने भिलाई स्थित भूपेश बघेल के घर पर छापा मारा। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई। ईडी को शक है कि चैतन्य इस घोटाले में पैसों की हेराफेरी में शामिल हैं।

 

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

ईडी की कार्रवाई के बाद भूपेश बघेल ने एक्स (पुराना ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर कर कहा “ईडी आ गई है। आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है। तमनार में अडानी के लिए पेड़ काटने का मुद्दा उठाना था, लेकिन ‘साहेब’ ने भिलाई निवास में ईडी भेज दी।”

 

 

ईडी की कार्रवाई के समय विधानसभा के लिए रवाना हुए बघेल

– ईडी की छापेमारी के दौरान भूपेश बघेल रायपुर स्थित विधानसभा के लिए रवाना हो गए। वहीं, उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई और बैरिकेडिंग को गिरा दिया, जिससे मौके पर हल्का तनाव पैदा हो गया।

 

3200 करोड़ रूपये का हुआ शराब घोटाला

बीते 11 जुलाई को छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी विभाग से जुड़े 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई की। कुल 22 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। यह घोटाला 2019 से 2023 के बीच हुआ था, जब भूपेश बघेल की सरकार सत्ता में थी। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीके से कमाई कर जमीन-जायदाद खरीदी और संपत्ति बनाई।

 

जांच में खुलासा: संगठित गिरोह की तरह चला घोटाला

इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने की। जांच में सामने आया कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट की तरह चलाया गया था। इस घोटाले से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और दूसरे अवैध कामों में हुआ।

 

साय सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति

राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए सभी घोटालों की जांच की जाएगी, चाहे आरोपी कितने भी ताकतवर क्यों न हों। साय सरकार डीएमएफ घोटाले, महादेव सट्टा एप, तेंदूपत्ता वितरण घोटाले, और CGMSC मामले की भी जांच करवा रही है।

 

200 से ज्यादा भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई

पिछले 2 वर्षों में 200 से अधिक अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इन सभी मामलों में कड़ी कार्रवाई की है और कई अफसरों को जेल भी भेजा गया है।

ये था पूरा मामला

मामले संबंधी मिली जानकारी के अनुसार ईडी ने आरोप लगाया है कि सरकारी अधिकारियों, नेताओं और शराब कारोबारियों ने एक योजना चलाई जिसके तहत 2019 से 2022 के बीच प्रदेश में शराब की बिक्री से लगभग 2,161 करोड़ की अवैध वसूली की गई। कथित घोटाले में शराब सप्लाई चैन में हेराफेरी शामिल थी, जहां इन लोगों ने सरकारी दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री और वितरण को नियंत्रित किया।

ईडी ने जांच में ये भी पाया है कि तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को इस घोटाले से हर महीने मोटी नकद रकम दी जाती थी। वहीं, शराब बनाने वाली कंपनियों से रिश्वत केस में ली जाती थी. ये शराब छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम (CSMCL) की ओर से खरीदी गई थी। जांच में ये भी मिला है कि बिना किसी रिकॉर्ड के कच्ची शराब की बिक्री होती थी, जिसका पैसा सरकार के पास न जाकर सीधे सिंडिकेट के जेब में गया है। साथ ही FL-10A लाइसेंस धारकों से भी विदेशी शराब के धंधे में एंट्री लेने के नाम पर रिश्वत वसूली जाती थी।

वहीं, ईडी इस मामले में अब तक लगभग 205 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर चुकी है। आगे की जांच ईडी द्वारा लगातार जारी है।

 

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