नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने “विशेष गहन पुनरीक्षण” (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया शुरू की है। यह काम पूरे देश में होगा, लेकिन सबसे पहले बिहार में शुरू किया गया है क्योंकि वहां साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। आइये जानते हैं इसे विस्तार से…
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)?
यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सही बनाने के लिए होती है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी योग्य नागरिकों का नाम सूची में हो। जो अब वोट देने के हकदार नहीं हैं, उनका नाम हटा दिया जाए। किसी व्यक्ति का नाम दो जगह न हो।
क्यों जरूरी है यह पुनरीक्षण?
पिछले 20 वर्षों में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। लोग शिक्षा, नौकरी या शादी के कारण एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। कई बार लोग नई जगह पर नाम जुड़वा लेते हैं, लेकिन पुरानी जगह से हटवाना भूल जाते हैं, जिससे एक ही व्यक्ति के दो नाम हो जाते हैं, जो गलत है। देश में शहरीकरण तेजी से हुआ है और लोगों की जनसंख्या भी बढ़ी है। इन्हीं सब कारणों से चुनाव आयोग को यह गहन जांच जरूरी लगी।
कब-कब हुआ था ऐसा पुनरीक्षण?
-पिछले वर्षों में भी यह प्रक्रिया कई बार हो चुकी है, जैसे कि 1952-56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983-84, 1987-89, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003 और 2004 में। बिहार में अंतिम गहन पुनरीक्षण 2003 में हुआ था।
किस आधार पर किया जा रहा है पुनरीक्षण?
इस बार 2003 की मतदाता सूची को आधार माना जाएगा। अगर किसी व्यक्ति का नाम 2003 की सूची में नहीं है, तो उस व्यक्ति को नागरिकता और आयु संबंधी दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
क्या करना होगा आम मतदाताओं को?
आयोग के निर्देश अनुसार 25 जुलाई 2025 तक हर मतदाता को एक पहले से भरा हुआ फार्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) मिलेगा। यह फार्म भरकर वापस जमा करना जरूरी होगा। केवल वही लोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल होंगे जिन्होंने फार्म जमा किया होगा। जो फार्म नहीं भरेंगे, उनका नाम ड्राफ्ट सूची से हट सकता है।
बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांगों के लिए मदद का प्रबंध
बूढ़े, बीमार, विकलांग, गरीब और कमजोर वर्गों को इस प्रक्रिया में परेशान न किया जाए। जहां जरूरत हो, स्वयंसेवकों की मदद ली जाए। किसी का नाम बिना जांच के और मौका दिए बिना नहीं हटाया जाएगा।
अगर किसी को नाम हटाने पर आपत्ति हो तो?
यदि किसी व्यक्ति का नाम हटाया जाता है और वह इससे संतुष्ट नहीं है तो वह पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास शिकायत कर सकता है। अगर वहां से संतुष्टि न हो, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास 30 दिन के अंदर अपील की जा सकती है। (यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत दी गई है।)
नए वोटर या स्थान बदलने वाले क्या करें?
-नया वोटर बनना चाहता है या किसी और राज्य से आकर बिहार में नाम जुड़वाना चाहता है, तो उसे Form 6 या Form 8 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र भी देना होगा।