Last Updated: September 29, 2026

Dainik Savera Times Logo

Amit Shah: ‘अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म आएगी’, अमित शाह बोले- देशी भाषाओं पर गर्व करने का समय आ गया

June 19, 2025

Amit Shah: ‘अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म आएगी’, अमित शाह बोले- देशी भाषाओं पर गर्व करने का समय आ गया

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत की भाषाई धरोहर को पुनः स्थापित करने और देशी भाषाओं पर गर्व करने का समय अब आ गया है। उन्होंने यह बयान पूर्व आईएएस अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री की पुस्तक ‘मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं’ के विमोचन कार्यक्रम में दिया।

अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म महसूस होगी

शाह ने कहा, “भारत में अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म महसूस होगी। हम ऐसे समाज का निर्माण करने जा रहे हैं, जहां केवल अपनी भाषाओं पर गर्व होगा। हमारे देश की भाषाएं हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। अपनी भाषाओं के बिना हम असली भारतीय नहीं रह सकते।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश, हमारे इतिहास, हमारी संस्कृति और हमारे धर्म को समझने के लिए विदेशी भाषाएं कभी भी पर्याप्त नहीं हो सकतीं। केवल अपनी भाषा में ही भारत की पूरी कल्पना की जा सकती है। यह लड़ाई कठिन हो सकती है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय समाज इसे जीतेगा। एक दिन हम गर्व से अपनी भाषाओं में ही अपने देश को चलाएंगे और दुनिया का नेतृत्व करेंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी के ‘पंच प्रण’ पर भी बात की

अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गढ़े गए ‘पंच प्रण’ (पांच प्रतिज्ञाओं) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रतिज्ञाएं अब देश के 130 करोड़ लोगों का संकल्प बन चुकी हैं। शाह ने कहा, “मोदी जी ने अमृत काल के लिए पंच प्रण की नींव रखी है। यह हमें विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने, गुलामी के निशानों से मुक्त होने, अपनी विरासत पर गर्व करने, एकता और एकजुटता बनाए रखने, और हर नागरिक में कर्तव्य का एहसास दिलाने की दिशा में मदद करेगा। यही कारण है कि 2047 तक हम शिखर पर होंगे, और हमारी भाषाएं इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।”

प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में बदलाव की आवश्यकता

अमित शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में बदलाव लाने की जरूरत है। ब्रिटिश काल से प्रभावित इस मॉडल को अब बदलने का समय आ चुका है। अगर प्रशासन बिना सहानुभूति के काम करेगा, तो वह शासन के असली उद्देश्य को नहीं पा सकता।”

साहित्य को समाज की आत्मा बताया

शाह ने भारतीय साहित्य की भी सराहना की और इसे हमारे समाज की आत्मा बताया। उन्होंने कहा, “जब हमारा देश अंधकार में डूबा हुआ था, तब भी साहित्य ने हमारे धर्म, स्वतंत्रता और संस्कृति को बचाए रखा। जब सरकारें बदलती थीं, तो किसी ने इसका विरोध नहीं किया। लेकिन जब भी हमारे धर्म, संस्कृति और साहित्य को खतरा हुआ, समाज ने उसे बचाया। साहित्य हमारे समाज की आत्मा है।” अमित शाह ने अपने भाषण में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और साहित्य के महत्व को उजागर करते हुए, भारतीय समाज को अपनी जड़ों से जुड़ने और गर्व के साथ अपनी भाषाओं को अपनाने की प्रेरणा दी।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें