Last Updated: October 12, 2026

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MiG-21 को आज विदाई: जानें कब आया था भारत और क्या थी इसकी खूबियां?

September 26, 2025

MiG-21 को आज विदाई: जानें कब आया था भारत और क्या थी इसकी खूबियां?

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे पुराने और ऐतिहासिक लड़ाकू विमानों में से एक, MiG-21 आज आधिकारिक रूप से सेवा से रिटायर हो रहा है। यह वही विमान है, जिसने न केवल भारत की हवाई सीमाओं की दशकों तक रक्षा की, बल्कि 1965, 1971 और 1999 की लड़ाइयों में निर्णायक भूमिका निभाई। यही नहीं, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद हुए हवाई संघर्ष में इसने एक अमेरिकी F-16 को मार गिराकर “F-16 किलर” की उपाधि भी अर्जित की।

भारत में MiG-21 की एंट्री कब हुई?

MiG-21 को भारतीय वायुसेना में 1963 में शामिल किया गया था। उस समय यह भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ था। रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) द्वारा विकसित इस सुपरसोनिक फाइटर जेट को भारत ने अपनी युद्धक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए खरीदा था। आने वाले दशकों में भारत ने इस विमान के 870 से अधिक यूनिट हासिल किए और कई को देश में ही HAL द्वारा असेंबल किया गया।

F-16 किलर कैसे बना MiG-21?

2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन भारतीय वायुसेना और पाकिस्तान एयरफोर्स के बीच हुई झड़प में, भारतीय पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान ने अपने MiG-21 बाइसन से एक पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया था। यह उपलब्धि इसलिए खास थी क्योंकि F-16 को दुनिया के सबसे एडवांस और घातक फाइटर जेट्स में गिना जाता है, जबकि MiG-21 उस समय तक 50 साल पुराना विमान था। इस घटना के बाद इसे “F-16 किलर” कहा जाने लगा।

MiG-21 की खूबियां क्या थीं?

अत्यधिक रफ्तार: मैक 2 यानी ध्वनि की गति से दोगुनी रफ्तार (लगभग 2,175 किमी/घंटा) तक उड़ सकता था।

रेंज: 1,470 किलोमीटर की फेरी रेंज, जो इसे लंबी दूरी तक मिशन के लिए सक्षम बनाती थी।

भारवहन क्षमता: 9,800 किलोग्राम तक वजन ले जाने की क्षमता, जिसमें बम, मिसाइल और ईंधन शामिल हैं।

हार्डप्वाइंट्स: 4 वेपन हार्डप्वाइंट्स, जिन पर विभिन्न प्रकार के हथियार और फ्यूल टैंक लगाए जा सकते थे।

MiG-21 अपने समय के हिसाब से तकनीकी रूप से बेहद उन्नत विमान था और इसने भारत को 20वीं सदी में हवाई युद्ध शक्ति में आत्मनिर्भर बनाया।

‘फ्लाइंग कॉफिन’ क्यों कहा गया?

हाल के वर्षों में MiG-21 को ‘Flying Coffin’ यानी उड़ता हुआ ताबूत कहा जाने लगा था। इसकी वजह थी लगातार हो रहे हादसे। पिछले कुछ दशकों में सैकड़ों MiG-21 क्रैश हुए, जिनमें 200 से ज्यादा पायलटों ने अपनी जान गंवाई। यद्यपि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नाम पूरी तरह उचित नहीं है क्योंकि अधिकांश हादसे तकनीकी खामियों से अधिक, ट्रेनिंग या रखरखाव की समस्याओं की वजह से हुए।

अब आगे क्या? कौन भरेगा इसकी जगह?

MiG-21 के रिटायर होने के बाद वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या फिलहाल घटकर 29 रह जाएगी, जबकि चीन और पाकिस्तान से एक साथ दो मोर्चों पर खतरे को देखते हुए 42 स्क्वाड्रन की जरूरत मानी जाती है।

इस गैप को भरने के लिए भारत अब अपनी स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना तेजस पर भरोसा कर रहा है।

फरवरी 2021 में HAL के साथ 83 तेजस Mk1A विमान का सौदा हुआ था (₹48,000 करोड़)।

इसके बाद हाल ही में 97 और तेजस Mk1A विमानों के लिए ₹62,370 करोड़ की डील को मंजूरी दी गई है।

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