इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी। लेकिन ट्रंप ने पुतिन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “पहले अपना रूस-यूक्रेन का मसला हल करो, फिर बाकी दुनिया की चिंता करो।”
पुतिन ने 18 जून 2025 को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि ईरान-इजरायल के विवाद का समाधान संभव है, और इसके लिए रूस ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के साथ प्रस्ताव भी साझा किए हैं। पुतिन का यह बयान रूस की मिडिल ईस्ट में अपनी कूटनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश को दर्शाता है। लेकिन ट्रंप ने इस पेशकश को सार्वजनिक रूप से नकारते हुए कहा कि रूस पहले अपने घरेलू विवाद, यानी रूस-यूक्रेन युद्ध, को सुलझाए।
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी टिप्पणी की और कहा कि “वहां हो रही मौतों को छिपाया जा रहा है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “एक इमारत गिरती है और आप कहते हो कि वहां कोई नहीं मरा, क्या यह मजाक है?”
पुतिन ने यह भी बताया कि दक्षिणी ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में 200 से अधिक रूसी कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह वही न्यूक्लियर प्लांट है जिसे रूस की रोसाटॉम कंपनी ने बनाया है। पुतिन के अनुसार, इजरायल ने रूस को यह भरोसा दिलाया है कि वह इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
इस बीच, इजरायल और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि हो रही है। इजरायल ने हाल ही में दावा किया था कि उसने 50 फाइटर जेट्स से ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने ड्रोन हमलों से जवाबी कार्रवाई की। अमेरिका ने भी इस संकट के बीच मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिससे हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। इस स्थिति में, अमेरिका, रूस और इजरायल के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, और आगे के घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।