
नेशनल डेस्क : देश के पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ ने चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम, सिक्किम और मणिपुर के सीएम और राज्यपाल से बातचीत की है और हालात का जायजा लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने इन राज्यों में लगातार हो रही बारिश और उससे पैदा हुई बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
PM ने दी हरसंभव मदद का भरोसा
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को हरसंभव सहायता और समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संकट की इस घड़ी में राज्यों के साथ खड़ी है और राहत व बचाव कार्यों के लिए पूरी सहायता दी जाएगी।
A short while ago, Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi ji called me to enquire about the current flood situation in Assam.
I briefed him on how continuous rainfall in Assam and adjoining states has led to flooding and impacted many lives. I also apprised him of the relief…
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 3, 2025
CM हिमंत सरमा ने दी स्थिति की जानकारी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। सरमा ने बताया “थोड़ी देर पहले प्रधानमंत्री ने मुझे फोन कर असम की बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली। मैंने उन्हें बताया कि लगातार बारिश से हालात कैसे बिगड़े हैं और राज्य सरकार कैसे राहत कार्य चला रही है। प्रधानमंत्री ने हमारी चिंता समझी और केंद्र की ओर से पूरा सहयोग देने का वादा किया। असम के लोगों की ओर से उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभारी हूं।”
बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, राहत कार्य जारी
लगातार बारिश की वजह से असम, सिक्किम और मणिपुर के कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई गांवों में पानी भर गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। राज्य सरकारों ने राहत शिविर, भोजन, दवाइयों और अन्य ज़रूरी सेवाओं की व्यवस्था शुरू कर दी है। पूर्वोत्तर भारत इस समय प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा की गई तत्परता और राज्यों को केंद्र की ओर से भरोसा मिलना राहत की बात है। अब देखना होगा कि राहत और पुनर्वास कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।