
नेशनल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के रिटायरमेंट के इतने समय बाद भी सरकारी आवास में बने रहने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट प्रशासन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर तत्काल प्रभाव से आवास खाली करवाने की मांग की है। कोर्ट का कहना है कि नियमों के अनुसार, रिटायरमेंट के 8 महीने बाद तक कोई भी अधिकारी उसी सरकारी बंगले में नहीं रह सकता। आइए जानते है इस पूरी खबर को विस्तार से…
सेवानिवृत्ति के बाद भी बना रहा है कब्जा
आपको बता दें कि नवंबर 2024 में रिटायर हुए पूर्व CJI चंद्रचूड़ को 5 कृष्ण मेनन मार्ग का टाइप-8 बंगला पद पर रहते आवंटित किया गया था। रिटायरमेंट के बाद उन्हें टाइप-7 के अस्थायी बंगले की स्वीकृति मिली थी, लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन से अनुरोध कर 30 अप्रैल 2025 तक पुराने बंगले में रहने की अनुमति ली। इसके बाद वर्तमान CJI बी.आर. गवई ने उन्हें 31 मई तक की और मोहलत दी थी। अब जब यह समय भी निकल चुका है, तो सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से खाली कराने की बात कही है।
नए जजों को हो रही आवास की परेशानी
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि नए नियुक्त जजों को आवास नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि पूर्व CJI अभी तक टाइप-8 के बंगले में रह रहे हैं। चिट्ठी में साफ तौर पर लिखा गया है कि 31 मई के बाद कोई अनुमति नहीं दी गई थी, और अब समय आ गया है कि उन्हें तत्काल वहां से हटाया जाए।
चीफ जस्टिस आवास का विशेष महत्व
गौर करने वाली बात यह है कि 5 कृष्ण मेनन मार्ग चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का आधिकारिक आवास होता है। लेकिन चंद्रचूड़ के बाद CJI बने संजय खन्ना और वर्तमान CJI बी. आर. गवई ने वहां नहीं रहने का विकल्प चुना। इसी कारण, चंद्रचूड़ को ज्यादा समय तक उसी बंगले में बने रहने की सुविधा मिलती रही।
चंद्रचूड़ ने देरी के पीछे बताई निजी मजबूरी
हालांकि, इस पूरे मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें वैकल्पिक आवास मिल चुका है, लेकिन वह पिछले दो सालों से बंद पड़ा था और रहने योग्य नहीं था। उन्होंने कहा कि मरम्मत का कार्य जैसे ही पूरा होगा, वे उसमें तुरंत शिफ्ट हो जाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उनकी दो बेटियाँ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं, जिन्हें AIIMS में विशेष इलाज मिल रहा है।
बेटियों की बीमारी के कारण घर ढूंढने में…
चंद्रचूड़ ने बताया कि उनकी दोनों बेटियों को नेमालीन मायोपैथी नामक जेनेटिक डिसऑर्डर है। इस कारण उन्हें ऐसा घर ढूंढने में समय लग गया जो उनकी बेटियों की देखभाल के लिए उपयुक्त हो। उन्होंने यह जानकारी पहले ही सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को दे दी थी और समझदारी की उम्मीद जताई थी। इसके साथ ही पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब पूर्व में सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को कुछ समय के लिए सरकारी आवास में बने रहने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझते हैं और जैसे ही हालात अनुकूल होंगे, बिना किसी देरी के शिफ्ट हो जाएंगे।