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नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक… भारत के पड़ोसी देशों में तख्तापलट और विद्रोह का लंबा सिलसिला

नेशनल डेस्क: नेपाल में सोशल मीडिया बैन करने का फैसला प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार पर भारी पड़ गया। युवाओं के गुस्से और लगातार बढ़ते प्रदर्शनों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शनकारी संसद में घुस गए और आगजनी कर डाली। काठमांडू की ऊंची इमारतों पर भी भीड़ ने कब्जा कर आग लगा दी।

इससे पहले ही ओली कैबिनेट के कई मंत्री इस्तीफा दे चुके थे। माना जा रहा है कि यह विरोध सिर्फ सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं था, बल्कि युवाओं की आजादी छीनने के प्रयासों के खिलाफ गुस्से का नतीजा था। सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई में करीब 19-20 लोगों की मौत हो गई और 300-400 लोग घायल हुए। अब नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है और भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नेपाल से पहले अफगानिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक तख्तापलट और विद्रोह का लंबा सिलसिला है जोकि इस प्रकार है…

पड़ोसी देशों में अस्थिरता के हालात

बांग्लादेश (2024)

अगस्त 2024 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई। आरोप था कि उनकी पार्टी अवामी लीग विपक्ष को दबा रही थी। लगातार प्रदर्शनों और हिंसा के बाद सत्ता अंतरिम सरकार के पास चली गई, जिसकी कमान मोहम्मद यूनुस को सौंपी गई।

पाकिस्तान (2023)

मई 2023 में तोशाखाना मामले में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में बगावत जैसे हालात बन गए। लाहौर से इस्लामाबाद तक सरकारी इमारतें जल उठीं, सेना के ठिकानों पर हमला हुआ और इंटरनेट बंद करना पड़ा। इस दौरान करीब 10,000 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों गिरफ्तारियां हुईं।

श्रीलंका (2022)

आर्थिक संकट ने श्रीलंका को बुरी तरह झकझोर दिया। महंगाई, बिजली कटौती और ईंधन की कीमतों ने जनता को सड़कों पर ला दिया। आंदोलनकारी राष्ट्रपति भवन तक घुस गए और तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा। इसे अरगलाया आंदोलन के नाम से जाना गया, जिसने श्रीलंका की राजनीति बदल दी।

अफगानिस्तान (2021)

अमेरिकी सेना की वापसी के बाद अगस्त 2021 में तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए और तब से अफगानिस्तान में लोकतंत्र की जगह तालिबान का कठोर शासन कायम है।

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