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G7 Summit 2025 : क्या है G7 समिट? जिसमें शामिल होने के लिए Canada जाएंगे PM मोदी

नेशनल डेस्क : PM मोदी आज, 15 जून को पांच दिन की विदेश यात्रा पर रवाना हो गए हैं। यह यात्रा साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया तक फैली हुई है। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाक के बीच हाल ही में बढ़े तनाव के बाद यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा है। इसी बीच आज हम यह जानेंगे कि G7 क्या है और इसकी स्थापना कब और कैसे हुई है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

क्या है G7 ?

आपको बता दें कि G7 एक ऐसा वैश्विक मंच है, जहाँ दुनिया के सबसे ताकतवर और उन्नत देश मिलकर वैश्विक समस्याओं पर चर्चा करते हैं। भले ही भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन उसकी तेजी से बढ़ती ताकत और वैश्विक असर ने उसे इस मंच पर एक प्रभावशाली अतिथि बना दिया है। इस बार कनाडा द्वारा भारत को बुलाना सिर्फ एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत अब वैश्विक निर्णयों में अहम भूमिका निभा रहा है। इस बीच आज हम यह जानेंगे की G7 क्या है और इसकी स्थापना कब हुई। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

विकसित और लोकतांत्रिक देशों का एक समूह…

G7 यानी “ग्रुप ऑफ सेवन”, दुनिया के सात सबसे विकसित और लोकतांत्रिक देशों का एक समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इन देशों की गिनती विश्व की सबसे बड़ी और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में होती है। यह समूह खुद को “मूल्यों का समुदाय” यानी कम्युनिटी ऑफ वैल्यूज मानता है, जो स्वतंत्रता, मानवाधिकारों, लोकतंत्र, कानून के शासन और सतत विकास जैसे सिद्धांतों में विश्वास रखता है। यह कोई औपचारिक संगठन नहीं है, बल्कि इन देशों का एक मंच है जहाँ हर साल वैश्विक समस्याओं पर चर्चा की जाती है। इनकी बैठकों को ही G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) कहा जाता है।

G7 क्यों बना ?

G7 की शुरुआत 1975 में हुई थी, जब दुनिया को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। उस समय अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी (तब पश्चिमी जर्मनी), इटली और जापान ने एक साथ मिलकर एक ऐसा समूह बनाने का सोचा जहाँ वे वैश्विक आर्थिक संकट पर मिलकर चर्चा कर सकें। उस समय महंगाई, मंदी और तेल संकट जैसे मुद्दे प्रमुख थे। 1976 में कनाडा भी इसमें शामिल हो गया। बाद में, यूरोपीय संघ (EU) भी 1981 से बैठकों में भाग लेने लगा, हालांकि उसे आधिकारिक सदस्य नहीं माना जाता। उसका प्रतिनिधित्व यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष करते हैं।

रूस को क्यों निकाला गया?

पहले G7 में रूस भी शामिल था और तब यह G8 कहलाता था। लेकिन 2014 में रूस ने यूक्रेन के क्राइमिया क्षेत्र पर कब्जा कर लिया, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ था। इसके बाद G7 के बाकी देशों ने रूस को समूह से बाहर कर दिया और फिर से यह G7 बन गया।

भारत की G7 में भूमिका क्या है?

भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन इसकी आर्थिक ताकत, जनसंख्या और वैश्विक प्रभाव को देखते हुए इसे हर साल विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया जाता है। खासकर हाल के वर्षों में भारत की भूमिका और भागीदारी लगातार बढ़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से अब तक चार बार G7 सम्मेलनों में हिस्सा ले चुके हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पाँच बार सम्मेलनों में भाग ले चुके हैं। भारत को G7 में आमंत्रित किया जाना दिखाता है कि दुनिया भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में देखती है।

इस साल G7 सम्मेलन में भारत को क्यों बुलाया गया?

2025 के जून महीने में कनाडा के कनानास्किस (अल्बर्टा प्रांत) में G7 शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कॉल कर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जिसे पीएम मोदी ने स्वीकार भी कर लिया। यह निमंत्रण भारत-कनाडा रिश्तों में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि पिछली सरकार के दौरान (जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में) दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आ गई थी, खासकर खालिस्तान मुद्दे को लेकर।

कनाडा का भारत को बुलाने का क्या मतलब है?

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के बारे में कहा कि यह “दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे अधिक आबादी वाला देश, और वैश्विक आपूर्ति शृंखला का एक अहम केंद्र है।” उन्होंने यह भी माना कि AI, ऊर्जा और खनिज संसाधनों जैसे वैश्विक विषयों पर भारत की भागीदारी जरूरी है। भले ही खालिस्तान से जुड़ी घटनाओं की जांच अभी चल रही है, फिर भी भारत को बुलाना यह दिखाता है कि G7 देश भारत के साथ संबंध मजबूत बनाए रखना चाहते हैं।

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