
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) में किए गए नए सुधारों का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सीतारमण ने बताया कि 22 सितंबर के बाद सरकार इस दिशा में तेजी से काम करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि दरों में की गई कटौती का लाभ सिर्फ कंपनियों तक ही न रहे, बल्कि आम लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा, “हमारा ध्यान इस बात पर होगा कि आम आदमी और मध्यम वर्ग की बुनियादी जरूरतों को सस्ता बनाया जाए। अब 99% सामान 5% या उससे कम कर दर में आ चुका है, सिर्फ 1% वस्तुएं ही 40% टैक्स दर में आती हैं।” 56वीं जीएसटी परिषद बैठक में टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया है। अब 12% और 28% वाली दरों को खत्म कर दिया गया है और सिर्फ तीन मुख्य स्लैब रखे गए हैं, 5%, 18% और 40%।
खाने-पीने और रसोई के सामान- मक्खन, घी, पनीर, नमकीन, भुजिया, मिक्सचर, बर्तन। खेती-बाड़ी के उपकरण जैसे- ड्रिप सिंचाई प्रणाली, स्प्रिंकलर, ट्रैक्टर, कीटनाशक, मिट्टी तैयार करने वाली मशीनें, कटाई के उपकरण और हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों के उत्पाद जैसे- सिलाई मशीन व पुर्जे और स्वास्थ्य संबंधी सामान जैसे चिकित्सा उपकरण, डायग्नोस्टिक किट इत्यादि।
छोटी कारें और 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें, इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू सामान, ज्यादातर ऑटो पार्ट्स और पेशेवर सेवाएं शामिल हैं।
तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी, शर्करा युक्त पेय पदार्थ, लक्जरी कारें, 350 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलें और नौकाएं व हेलीकॉप्टर इस कैटेगरी में आएंगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा, परिवार फ्लोटर बीमा और जीवन बीमा पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल कभी जीएसटी को “गब्बर सिंह टैक्स” कहकर उसका मजाक उड़ाते थे, लेकिन अब जब सरकार ने जीएसटी 2.0 सुधार लागू किए हैं तो वही इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और बीमा कंपनियां जीएसटी सुधारों को लागू करने में सरकार के साथ हैं। उनका मानना है कि इससे खपत बढ़ेगी, उद्योग को मजबूती मिलेगी और आम आदमी को राहत मिलेगी।
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